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श्रीलंका में घायलों को निकालने का प्रयास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस समिति (आईसीआरसी) श्रीलंका में उन घायल और बीमार 240 आम नागरिकों को निकाल रही है जो उत्तरपूर्वी इलाक़े में लड़ाई की वजह से फंसे हुए थे. रेडक्रास के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि बाहर निकाले गए लोगों को नावों से इलाज के लिए त्रिंकोमाली शहर भेजा जा रहा है. आईसीआरसी का कहना है कि ये लोग लगभग एक हफ़्ते से मुलईतिवु में एक अस्थाई अस्पताल में फंसे हुए थे. आईसीआरसी के अनुसार सोमवार को एक उपचार केंद्र पर बमबारी से कम से कम 16 मरीज़ मारे गए थे. ये बमबारी पुतुमत्तालान में हुई थी. संरक्षण नहीं आईसीआरसी के प्रमुख पॉल कासटेला का कहना है, " हम लोग हैरान है कि मरीज़ों को भी संरक्षण नहीं मिल पा रहा है जिसके वो हक़दार हैं." हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि इस बमबारी में किसका हाथ था. पिछले सप्ताह ऐसी ख़बरें आईं थीं कि सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच संघर्ष में अनेक नागरिक मारे गए हैं. रेडक्रॉस के अनुसार श्रीलंका में ताज़ा संघर्ष में सैंकड़ों नागरिक मारे गए हैं जबकि हज़ारों की संख्या में लोग फंसे हुए हैं. सोमवार को सेना का कहना था कि उत्तरपूर्व में उस समय 29 आम लोग मारे गए जब एक आत्मघाती महिला हमलावर ने एक संघर्ष प्रभावित इलाक़े में धमाका कर दिया था. ग़ौरतलब है कि लड़ाई के इलाक़े में पत्रकारों को जाने की इजाज़त नहीं है इसलिए किसी भी जानकारी पुष्टि नहीं की जा सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें तमिल विद्रोहियों के इलाक़े से पलायन08 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस अहम समुद्री ठिकाने पर कब्ज़े का दावा05 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका: अस्पताल पर फिर हमला03 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस अस्पताल पर हमले में कई बच्चे मारे गए02 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'युद्धक्षेत्र में बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित'31 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस द्रमुक ने एलटीटीई की आलोचना की30 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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