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नशे की गिरफ़्त में अफ़ग़ान पुलिस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ब्रितानी अधिकारी ने अनुमान लगाया है कि अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत में क़रीब साठ फ़ीसदी पुलिसकर्मी अफ़ीम और हेरोईन के आदी हैं. अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी राज्य हेलमंद में तैनात एक अनाम ब्रिटिश अधिकारी ने विदेश विभाग को भेजी ईमेल में ये बात कही है. बीबीसी को यह ईमेल सूचना के अधिकार क़ानून के ज़रिए मिली है. ब्रिटेन की चिंता ब्रिटेन के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा, "पुलिस में नशे की लत को लेकर हम बहुत चिंतित हैं." बयान में कहा गया है, " पुलिसकर्मियों को बहुत कम वेतन दिया जाता है, वे बहुत जोखिम वाला काम करते हैं जिसके लिए उन्हें बहुत प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है. पुलिस में नशे के सेवन के साथ-साथ उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार भी है." हेलमंद में दुनिया के क़रीब दो-तिहाई अफ़ीम का उत्पादन होता है जिसका इस्तेमाल हेरोइन बनाने में किया जाता है. हेलमंद के गवर्नर गुलाब मोहम्मद ने बीबीसी से कहा कि राज्य के पुलिस थानों में नशा एक 'बड़ी समस्या' है. उन्होंने बताया कि इसे रोकने के लिए ज़रूरी क़दम उठाए जा रहे हैं. नशीले पदार्थों के सेवन का दोषी पाए जाने पर हाल ही में करीब 10 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. ब्रिटिश अधिकारी ने अपनी ईमेल में लिखा है कि पुलिसकर्मियों में नशे का सेवन केवल हेलमंद तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह एक देशव्यापी समस्या है. अमरीका के नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान पुलिस के 5320 पुलिसकर्मियों पर किए गए परिक्षण में पता चला कि 16 फ़ीसदी जवान नशा करते हैं. इनमें से अधिकांश अफ़ीम खाते हैं. विश्लेषकों का मानना है कि पुलिसवालों में नशे की प्रवृत्ति देश के दक्षिणी हिस्से में और अधिक है. हेलमंद के पड़ोसी राज्य कंधार में 38 फ़ीसदी पुलिसकर्मी नशे के आदी मिले. इन इलाकों की पुलिस को बहुत कम वेतन पर बहुत अधिक ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है. विश्लेषकों का मानना है कि पुलिस के जवानों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का एक कारण यह भी हो सकता है. क़ाबुल स्थित रीजनल स्टडीज़ ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान के निदेशक अब्दुल ग़फ़ूर कहते हैं, "पुलिस को तालेबान की ओर से लगातार ख़तरा बना हुआ है. पुलिस के जवान मनोवैज्ञानिक दबाव से बचने के लिए अक्सर नशीली दवाओं का सेवन करने लगते हैं." हेरोइन ज़ब्त अफ़ग़ानिस्तान में तैनात ब्रितानी सैनिकों और अफ़ग़ान सैनिकों ने छापा मारकर बड़ी मात्रा में हेरोईन और नशीली दवाएँ बनाने में काम आने वाले रसायन ज़ब्त किए हैं. बाज़ार में इसकी क़ीमत क़रीब साढ़े तीन अरब रुपए है. ब्रितानी रक्षा सचिव जॉन हट्टन ने सैनिको की इस कामयाबी की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब्ती की यह कार्रवाई हेलमंद प्रांत में की गई. उन्होंने बताया कि सात सौ सैनिकों ने दवाओं के चार कारखानों पर छापा मारा. ब्रितानी और अफ़ग़ान सैनिकों के इस अभियान को ''ऑपरेशन डीज़ल" नाम दिया गया था और यह छह से 11 फ़रवरी तक चला. सैनिकों ने हेरोईन की ही तरह करीब 42 करोड़ रुपए मूल्य के 1295 किलो गीले अफ़ीम को नष्ट कर दिया. सैनिकों ने हेरोइन बनाने में काम आने वाला अमोनियम क्लोराइड, एसिटिक एनहाइड्राइड, सोडियम क्लोराइड, कैल्शियम हाइड्राक्सॉइड जैसे रसायन और बड़ी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया. |
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