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सोमवार, 09 मई, 2005 को 17:59 GMT तक के समाचार
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'अल क़ायदा के कारण दुर्दिन देखने पड़े'
मुतवक्किल
मुतवक्किल तीन साल तक अमरीकी हिरासत में रहे
अफ़ग़ानिस्तान के प्रमुख तालेबान नेता और पूर्व विदेश मंत्री वकील अहमद मुतवक्किल ने माना है कि ओसामा बिन लादेन और उनके समर्थकों के कारण अफ़ग़ानिस्तान को दुर्दिन देखने पड़े.

अमरीकी क़ैद से रिहा किए जाने के बाद पहली बार मुतवक्किल ने किसी पश्चिमी मीडिया संगठन को इंटरव्यू दिया है.

अफ़ग़ानिस्तान से तालेबान की सत्ता उखाड़े जाने के बाद मुतवक्किल तीन साल तक अमरीकी हिरासत में रहे और फिर काबुल में उनको नज़रबंद रखा गया.

इन दिनों वो अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और तालेबान के बीच संबंध सुधारने की कोशिशों में लगे हैं.

काबुल में मुतवक्किल ने बीबीसी से बात की लेकिन तालेबान शासन के कुछ पहलुओं पर अफ़सोस उन्हें अब भी नहीं है.

बदलाव

अमरीकी क़ैद से लौटने के बाद मुतवक्किल के कुछ विचारों में भी बदलाव आया है.

उन्होंने कहा है कि वो अब लड़कियों को शिक्षा दिए जाने के पक्ष में हैं बशर्ते ये काम अफ़ग़ानिस्तान की संस्कृति के मुताबिक़ किया जाए.

अफ़ग़ानिस्तान सरकार और अमरीकी फ़ौज ने एक बार फिर उन सभी तालेबान समर्थकों को माफ़ी देने का ऐलान किया है जो उनके मुताबिक़ गंभीर अपराधों में शामिल न हों.

मुतवक्किल ने भी माना कि तालेबान के साथ लड़ाई फिर तेज़ी पकड़ रही है.

पिछले एक हफ़्ते के दौरान ही इन झड़पों में कम से कम सत्तर लोग मारे गए हैं.

मुतवक्किल चाहतें हैं कि तालेबान के साथ बातचीत की जाए. उन्होंने कहा है कि शांति क़ायम करने के लिए ये बातचीत ज़रूरी है.

आत्मसम्मान

मुतवक्किल का कहना है कि तालेबान समर्थकों को ये विश्वास दिलाया जाना चाहिए कि अगर वो सरकार के नज़दीक आए तो उनका आत्मसम्मान बरक़रार रखा जाएगा.

 अफ़ग़ानिस्तान की ऐतिहासिक समस्या ये रही है कि यहाँ के मेहमान या तो बहुत अमीर रहे या फिर काफ़ी ताक़तवर. पहले रूसी, फिर अरब और अब सिर्फ़ अमरीकी ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन और नेटो. इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे आज के मेहमान हमारी फ़ौजों के मुक़ाबले तकनीकी तौर पर कहीं ज़्यादा ताक़तवर हैं
मुतवक्किल

मुतवक्किल ने कहा कि ओसामा बिन लादेन और उनके समर्थकों ने हमारी मेहमाननवाज़ी का ग़लत फ़ायदा उठाया और वो लोग अफ़ग़ानिस्तान के लिए मुश्किलें लेकर आए.

उन्होंने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान की ऐतिहासिक समस्या ये रही है कि यहाँ के मेहमान या तो बहुत अमीर रहे या फिर काफ़ी ताक़तवर. पहले रूसी, फिर अरब और अब सिर्फ़ अमरीकी ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन और नेटो. इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे आज के मेहमान हमारी फ़ौजों के मुक़ाबले तकनीकी तौर पर कहीं ज़्यादा ताक़तवर हैं."

उन्होंने कहा है कि अगर अफ़ग़ानिस्तान की जनता के प्रतिनिधियों को लगा कि अमरीका की मौजूदगी देशहित में है तो अमरीका वहाँ बना रहेगा.

मुतवक्किल का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान की मौजूदा सरकार कुछ मामलों में तालेबान से सबक ले सकती है.

उन्होंने कहा कि तालेबान शासन के दौरान लोग ज़्यादा सुरक्षित थे, अफ़ीम की खेती तक़रीबन ख़त्म कर दी गई थी और भ्रष्टाचार काफ़ी कम हो गया था.

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