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'आम लोगों को निशाना बना रहे हैं विद्रोही' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने उन ख़बरों पर चिंता जताई है जिनमें कहा गया है कि जो लोग श्रीलंका के तमिल विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े से भागने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें विद्रोही गोली मार रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इसमें कई लोगों की मौत हुई है. उल्लेखनीय है कि श्रीलंका सेना और तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में हजा़रों लोग फंसे हुए हैं. इसमें से बहुत से लोग उत्तरी इलाक़े के सरकारी 'सुरक्षित क्षेत्र' में हैं. इन 'सुरक्षित क्षेत्रों' से भी संघर्ष की ख़बरें आ रही हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ये ख़बरें विश्वसनीय हैं क्योंकि जो लोग विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े से भागकर आने में कामयाब हो गए, उनसे ये जानकारी मिली है. संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान जारी कर श्रीलंका सेना और विद्रोहियों दोनों से आम नागरिकों को जोखिम में न डालने का अनुरोध किया है. अलग तर्क कुछ समय पहले तमिल विद्रोहियों ने लोगों पर गोली चलाने की बात से इनकार किया था. उनकी दलील थी कि लोग उनके प्रभुत्ववाले इलाक़ों में इसलिए बने रहना चाहते हैं क्योंकि वे श्रीलंका सेना से डरते हैं. ग़ौरतलब है कि श्रीलंका में इन दिनों सेना और स्वायत्तता की मांग कर रहे तमिल विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष छिड़ा हुआ है. ताज़ा सशस्त्र अभियान में तमिल विद्रोहियों को काफ़ी नुक़सान भी हुआ है. लगभग ढाई दशक से तमिल विद्रोही अलग राष्ट्र की मांग को लेकर सशस्त्र लड़ाई लड़ रहे हैं और इस संघर्ष में दोनों पक्षों के कम से कम 70 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं. कुछ मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सेना और एलटीटीई के बीच संघर्ष में पिछले कुछ दिनों के दौरान सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं और लाखों अन्य संघर्ष वाले इलाक़े में फँसे हुए हैं. |
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