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पाकिस्तान को हथियार देने का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने कहा है कि वह पाकिस्तान को हथियार बेचे जाने का विरोध करता है. भारत के विदेश सचिव ने कहा है कि "अंतरराष्ट्रीय बिरादरी इस मामले में काफ़ी कुछ कर सकती है, मिसाल के तौर पर पाकिस्तान को होने वाली हथियारों की बिक्री का आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है. यह शराब के किसी लती को व्हिस्की देने जैसा है." पेरिस में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा, "भारत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के केंद्र पाकिस्तान से बिल्कुल सटा हुआ है." मेनन ने कहा, "आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क, उनका संचालन तंत्र, आधिकारिक प्रायोजक और आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने के हथकंडे किसी देश की सीमा में नहीं बंधे हैं लेकिन वे एक देश की सीमा के भीतर से संचालित होते हैं, और भारत को इसके कुपरिणाम भुगतने पड़ते हैं." फ्रांसीसी अतंरराष्ट्रीय संबंध संस्थान के सम्मेलन में मेनन ने कहा, "ऐसी ताक़तों के साथ किसी तरह का समझौता, भले ही वह कितना व्यावहारिक यानी अल्पकाल में फ़ायदेमंद दिख रहा हो, सिर्फ़ उनका हौसला ही बढ़ाएगा." 'आईएसआई की उपज' भारत के विदेश सचिव ने मुंबई और काबुल में दूतावास पर हमले की साज़िश रचने वालों को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी 'आईएसआई की उपज' बताया है. विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा है कि जो लोग इन वारदातों के पीछे हैं वे पूरी दुनिया में हमले करने की साज़िश रचते हैं और उनसे किसी तरह का 'समझौता' काफ़ी ख़तरनाक हो सकता है. मुंबई और काबुल के हमलों का ज़िक्र करते हुए मेनन ने कहा, "ऐसे हर मामले में हमलावरों ने साज़िश, तैयारी, ट्रेनिंग सब कुछ पाकिस्तान में की, इन हमलों की साज़िश रचने वाले आईएसआई की पैदावार हैं और उनसे जुड़े रहे हैं." भारतीय विदेश सचिव ने कहा, "मुंबई हमलों को दो महीने हो चुके हैं, हमने उन्हें सबूत की फ़ाइल एक महीने पहले सौंपी थी लेकिन अभी तक पाकिस्तान का आधिकारिक जवाब नहीं मिला है." मेनन ने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ अमन चाहता है क्योंकि यह उसके अपने हित में है, भारत इसके लिए पाकिस्तान और दुनिया के सभी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है. |
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