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शनिवार, 24 जनवरी, 2009 को 05:20 GMT तक के समाचार
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जब गीलानी ने लिया मोदी का सहारा...
गिलानी और मोदी
मोदी ने कहा था कि भारत में ही ऐसा क़ानून नहीं जो कसाब के बयान को सबूत माने
मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के माहौल में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी ने भारत के दस्तावेज़ो पर अपने रुख़ को सही ठहराने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी का सहारा लिया है.

भारत ने पाकिस्तान को मुंबई हमलों की प्रारंभिक जाँच के आधार पर कुछ दस्तावेज़ सौंपे थे. जहाँ भारत इन्हें पाकिस्तानी तत्वों के हमलों में शामिल होने का सबूत कहता है वहीं पाकिस्तान इन्हें मात्र जानकारी बताया है.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री गीलानी ने शुक्रवार को यह कहकर सबको चौंका दिया कि उनके इन दस्तावेज़ो को मात्र जानकारी बताने के उनके रुख़ की गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पुष्टि की है.

 मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी साहब ने भी कहा है कि जो हमें बताया गया है वह केवल जानकारी है सबूत नहीं. उन्होंने जो कहा है वह हमारे रुख़ से मेल खाता है
प्रधानमंत्री गीलाना

इस्लामाबाद में उनका कहना था, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी साहब ने भी कहा है कि जो हमें बताया गया है वह केवल जानकारी है सबूत नहीं. उन्होंने जो कहा है वह हमारे रुख़ से मेल खाता है."

उधर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में कहा था, "हम मुंबई हमलों के दौरान जिंदा पकड़े अजमल कसाब के बयान को पाकिस्तान को भेजते हैं और कहते हैं कि ये रहा सबूत...हम अमरीका को कसाब के बयान से अवगत कराते हैं और कहते हैं ये रहा सबूत..."

समाचार एजेंसियों के अनुसार मुख्यमंत्री मोदी ने आगे कहा, "लेकिन यदि पाकिस्तान और अमरीका पलट कर पूछें कि क्या ये जो जानकारी आपने हमें दी है उन्हें आपके अपने क़ानून के तहत सबूत माना जाएगा? कितना दुर्भाग्यपूर्ण है ये कि मेरे अपने देश में ऐसा क़ानून नहीं जिसके तहत पकड़े गए चरमपंथी का बयान सबूत माना जाए?"

 हम मुंबई हमलों के दौरान जिंदा पकड़े अजमल कसाब के बयान को पाकिस्तान को भेजते हैं और कहते हैं कि ये रहा सबूत...हम अमरीका को कसाब के बयान से अवगत कराते हैं और कहते हैं ये रहा सबूत...लेकिन यदि वे हमसे पलट कर पूछें कि क्या ये जानकारियाँ आपके देश के क़ानून के तहत सबूत मानी जाएँगी?
मुख्यमंत्री मोदी

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान ने भारत के दस्तावेज़ों को मात्र जानकारी बताते हुए ये भी कहा है कि किसी पाकिस्तानी नागरिक को भारत के सुपुर्द नहीं किया जाएगा.

पाकिस्तान का तर्क है कि दोनों देशों के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है.

पाकिस्तान ने दोहराया है कि यदि कोई पाकिस्तानी दोषी पाया जाता है तो उस पर पाकिस्तान में ही मुकदमा चलाया जाएगा.

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