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शुक्रवार, 16 जनवरी, 2009 को 10:26 GMT तक के समाचार
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'दोषियों को सौंपने की माँग पर कायम हैं'
प्रणव
'1972 के पाक प्रत्यर्पण क़ानून में प्रावधान है कि बिना किसी संधि के भी प्रत्यर्पण संभव है'
मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि भारत ने अपनी उस माँग को नहीं छोड़ा है कि 'पाकिस्तान में मौजूद हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को भारत के सुपुर्द किया जाए.'

मीडिया में हाल में ख़बरें छपी थीं कि भारत ने अपने रुख़ में नरमी लाते हुए पाकिस्तान में मौजूद हमले के कथित दोषियों पर पाकिस्तान में ही निष्पक्ष मुक़दमा चलाने पर सहमति जताई है.

गुरुवार को विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था, "यह आदर्श स्थिति होगी कि भारत जिन लोगों को दोषी मानता है पाकिस्तान उन्हें भारत को सौंप दे. लेकिन अगर यह संभव न हो तो कम से कम इनके ख़िलाफ़ पाकिस्तान में निष्पक्ष मुक़दमा तो चले."

 आतंकवादी घटना भारत की ज़मीन पर हुई है इसलिए दोषियों को भारतीय न्याय का सामना करना होगा. जिन्हें हम दोषी मानते हैं उनका प्रत्यर्पण कर पाकिस्तान उन्हें भारत को सौंपे. हमारे उस माँग से पीछे हटने का सवाल पैदा नहीं होता
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी

'पाक प्रत्यर्पण क़ानून में प्रावधान'

शुक्रवार को प्रणव मुखर्जी का कहना था कि भारत के रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है.

उनका कहना था कि मुंबई हमलों के पूरे षड्यंत्र का पता तभी चलेगा जब पाकिस्तान में पूरी, पारदर्शी और सफल जाँच होगी.

उनका कहना था, "हमनें पाकिस्तान से इस बारे में कदम उठाने के लिए कहा है. पाकिस्तान की ज़िम्मेदारी है कि वह जाँच करे और मुकदमा चलाए. उसकी ज़िम्मेदारी ये भी है कि वह उन लोगों को आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने से रोके जो उसकी ज़मीन पर मौजूद हैं."

उनका कहना था कि ये स्वीकार्य नहीं कि वे इसलिए साफ़ बच जाएँ क्योंकि घटना कहीं और हुई है और वे पाकिस्तानी नागरिक हैं और वहाँ मौजूद हैं."

 ज़िम्मेदारी ये भी है कि वह उन लोगों को आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने से रोके जो उसकी ज़मीन पर मौजूद हैं. ये नहीं कि वे इसलिए साफ़ बच जाएँ क्योंकि घटना कहीं और होती है और वे पाकिस्तानी नागरिक हैं और वहाँ मौजूद हैं
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी

लेकिन उन्होंने मुकदमा चलाने के बारे में भारत के रुख़ को स्पष्ट करते हुए कहा, "आतंकवादी घटना भारत की ज़मीन पर हुई है इसलिए दोषियों को भारतीय न्यायपालिका का सामना करना होगा. जिन्हें हम दोषी मानते हैं उनका प्रत्यर्पण कर पाकिस्तान उन्हें भारत को सौंपे. उस माँग से पीछे हटने का सवाल पैदा नहीं होता."

भारतीय विदेश मंत्री मुखर्जी का कहना था कि पाकिस्तान के 1972 के प्रत्यर्पण क़ानून में साफ़ तौर पर प्रावधान है कि बिना किसी प्रत्यर्पण संधि के भी प्रत्यर्पण हो सकता है. उनका कहना था कि सार्क देशों की संधि और अन्य अंतरराष्ट्रीय संधियों में इसका प्रावधान है.

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