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'आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध' पर आपत्ति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने कहा है कि 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध,' का विचार, जिसमें सैन्य कार्रवाई पर ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर दिया गया है, एक 'ग़लती' है. लंदन के गार्डियन अख़बार के लिए लिखते हुए उन्होंने कहा है कि इस विचार ने अलग-अलग 'आतंकवादी संगठनों' को एकजुट कर दिया है. उनका कहना था कि इस ख़तरे पर उचित प्रतिक्रिया क़ानून और मानवाधिकारों को प्राथमिकता देना है, उसे पीछे छोड़ना नहीं. ब्रितानी विदेश मंत्री मिलिबैंड अपने ये विचार गुरुवार को मुंबई में रखने जा रहे हैं. ग़ौरतलब है कि मिलिबैंड ने ये विचार राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल के ख़त्म होने से पाँच दिन पहले रखे हैं. उन्होंने लिखा है - "ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद से आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध के कथन ने आतंकवाद का सामना करने के संदर्भ में पूरी स्थिति को परिभाषित किया है. चाहे उसके अपने फ़ायदे हैं लेकिन अंतत: ये विचार सही दिशा में ले जाने वाला नहीं है." ये कथन सबसे पहले राष्ट्रपति बुश ने अमरीकी संसद के संयुक्त सत्र को 20 सितंबर 2001 को संबोधित करते हुए इस्तेमाल किया था. उन्होंने लिखा है - "इतिहासकार आकलन करेंगे कि क्या इस विचार (आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध) ने फ़ायदे से ज़्यादा नुकसान किया है या नहीं...आतंकवाद एक ख़तरनाक रणनीति है, संगठन या विचारधारा नहीं.." मिलिबैंड का कहना है कि विभिन्न गुटों को अलग-अलग विचारों से प्रभावित अलग-अलग गुट ही मानना चाहिए और इसे उदारवादियों और उग्रवादियों के बीच संघर्ष मानना ग़लती होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान ने माना, कसाब हमारा नागरिक07 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस चिदंबरम से मिले अमरीकी राजदूत 22 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'संदिग्ध लोग भारत को नहीं सौंपे जाएँगे'09 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान को पर्याप्त सबूत दिए गए हैं' 31 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'भारत ने जानकारी दी, सबूत नहीं'06 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'सत्ता में होते तो वार्ता बंद कर देते'20 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस पाक समेत कई देशों ने निंदा की26 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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