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'सत्ता में होते तो वार्ता बंद कर देते' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिंह ने कहा है कि यदि इस समय भाजपा सत्ता में होती तो वह भारत-पाक समग्र वार्ता बंद ही कर देती. समाचार एजेंसियों के अनुसार यशवंत सिन्हा का कहना था कि भाजपा केवल समग्र वार्ता पर अल्पविराम न लगाती, जिस तरह से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने किया है. उनका कहना था, "हमारी सरकार से कई तरह के स्वर आ रहे हैं. ताकत या कमज़ोरी को छोड़ दें तो भी ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं पिछले कुछ दिनों में सरकार का (स्थिति पर) नियंत्रण घटा है." मंत्रियों के अलग-अलग स्वर यशवंत सिन्हा ने कहा, "हमनें एक ही दिन में विदेश मंत्री से एक बात सुनी है और रक्षा मंत्री से कुछ और बात सुनी है. बेहतर हो यदि भारत सरकार के प्रवक्ताओं के कथन में एकता और सामंजस्य हो." उनका कहना था कि पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए उच्च स्तरीय राजनीतिक प्रतिनिधियों को अमरीका और ब्रिटेन के अलावा भिन्न देशों में भेजना चाहिए जहाँ वे पाकिस्तानी तत्वों के मुंबई हमलों से संबंधों के पुख़्ता सबूत पेश करें. उनका कहना था कि सरकार के मंत्रियों को आपस में चर्चा करने के बाद किसी स्पष्ट फ़ैसले पर पहुँचना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें एनएसजी की अहम बैठक शुरू04 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस एनएसजी की बैठक में सहमति नहीं22 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना धोखा देने का सवाल ही नहीं: मुखर्जी 21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'सरकार जनता को गुमराह न करे'21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस विपक्ष ने प्रधानमंत्री से सफ़ाई माँगी10 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस वामदलों की समर्थन वापसी की घोषणा08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस '...तो इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा'05 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस परमाणु करार में आए उतार-चढ़ाव04 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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