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एनएसजी की अहम बैठक शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर एक अमरीकी अख़बार में छपी रिपोर्ट से उठे विवादों के बीच गुरुवार को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के देशों की अहम बैठक शुरू हो गई है. विएना में हो रही दूसरे दौर की बैठक में बिना किसी संशोधन के असैनिक परमाणु समझौते से जुड़े मसौदे को पारित करवाना भारत और अमरीका के लिए आसान नहीं होगा. 45 सदस्यीय एनएसजी में न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और स्विट्ज़रलैंड परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तख़त किए बिना भारत को परमाणु ईंधन की आपूर्ति की गारंटी देने का विरोध कर रहे हैं. इन देशों ने बैठक से पहले बुधवार को आपस में अगली रणनीति तय करने के लिए आपस में चर्चा की है. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब बुश प्रशासन के अपने सांसदों को लिखे एक पत्र के सार्वजनिक होने से भारत में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने बुश प्रशासन की ओर से वहाँ की संसद की विदेशी मामलों की समिति के सदस्यों को लिखा एक पत्र छापा है जिसमें कहा गया है कि यदि भारत परमाणु परीक्षण करता है तो उसे परमाणु ईंधन की आपूर्ति रोक दी जाएगी. 'अमरीका का आंतरिक मामला' इस ख़बर के बाद भारत में विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार पर हमले तेज़ कर दिए और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बुधवार रात आपात बैठक बुलानी पड़ी. बैठक के बाद विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना था, "हमनें संबंधित रिपोर्ट पर चर्चा की लेकिन किसी देश के सरकार के आंतरिक संवाद पर टिप्पणी करना हमारी नीति नहीं है." उन्होंने कहा कि 'हम अमरीका के साथ असैनिक परमाणु समझौते के दायरे में ही आगे बढ़ेंगे.' ग़ौरतलब है कि मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शुरु से कहती आ रही है कि परमाणु समझौता भारत की संप्रभुता के साथ समझौता है क्योंकि इससे परमाणु परीक्षण करने का अधिकार ख़त्म हो जाएगा. हालाँकि प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि समझौते में इस तरह का कोई ज़िक्र नहीं है और भारत परमाणु परीक्षण करने के लिए स्वतंत्र है. परमाणु परीक्षण के मुद्दे पर ही वामपंथी दलों ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. |
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