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गुरुवार, 15 जनवरी, 2009 को 17:52 GMT तक के समाचार
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'पाक में भी मुक़दमे पर आपत्ति नहीं'
ताज होटल पर हमला
मुंबई पर हुए हमलों के सबूतों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं
पाकिस्तान में छिपे हुए चरमपंथियों को लेकर अपने रुख़ में नरमी लाते हुए भारत ने कहा है कि यदि उन पर पाकिस्तान में भी निष्पक्ष मुक़दमा चले तो आपत्ति नहीं है.

भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, "यह आदर्श स्थिति होगी कि भारत के भगोड़ों को पाकिस्तान भारत को सौंप दे. लेकिन अगर यह संभव न हो तो कम से कम इन भगोड़ों के ख़िलाफ़ पाकिस्तान में निष्पक्ष मुक़दमा तो चले."

इससे पहले भारत इन चरमपंथियों को भारत के सौंपने पर ही ज़ोर दे रहा था. पाकिस्तान में मुक़दमा चलाए जाने पर आपत्ति न होने की बात भारत ने हाल के दिनों में पहली बार कही है.

पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा के अध्यक्ष रहमान मलिक के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत के विदेश मंत्री ने कहा है कि भारत पहले ही सबूत सौंप चुका है.

उन्होंने पाकिस्तान को अपनी बात कहने के लिए मीडिया की बजाय राजनयिक रास्तों का उपयोग करने की सलाह दी है.

रुख़ में नरमी

टेलीविज़न चैनल 'आजतक' से हुई बातचीत में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि यदि इन 'भगोड़ों' को भारत को सौंपना संभव न हो तो भारत को आपत्ति नहीं होगी यदि पाकिस्तान में ही उन पर 'निष्पक्ष मुक़दमा' चले.

प्रणब मुखर्जी
प्रणब मुखर्जी ने मीडिया के ज़रिए बातचीत पर भी आपत्ति जताई है

उन्होंने कहा कि यह कोई 'दिखावटी मुक़दमा' नहीं होना चाहिए बल्कि 'पारदर्शी और सबको दिखाई पड़ने वाला' मुक़दमा होना चाहिए.

इससे पहले भारत यह कहता रहा है कि पाकिस्तान को उन लोगों को भारत को सौंप देना चाहिए जो भारत में चरमपंथी गतिविधियों के मामलों में वांछित हैं और उन पर भारतीय न्यायालयों में ही मुक़दमा चलाया जाएगा.

भारत कहता रहा है कि पाकिस्तान की न्याय प्रणाली पर उसे भरोसा नहीं है क्योंकि उस पर तो ज़रदारी सरकार को भी भरोसा नहीं है क्योंकि उन्होंने भी बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच संयुक्त राष्ट्र से करवाने की माँग की थी.

जबकि पाकिस्तान लगातार कहता रहा है कि वह भारत को किसी को नहीं सौंपेगा और जो भी मुक़दमा चलेगा वह पाकिस्तान में ही चलेगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारत के रुख़ में यह नरमी ब्रिटेन के उस बयान के बाद दिखाई पड़ रही है जिसमें कहा गया था कि 'भगोड़ों' को भारत को सौंपना ज़रुरी नहीं है और उन पर पाकिस्तान में भी मुक़दमा चल सकता है.

दबाव के कारण

 अमरीका और ब्रिटेन इस बात को लेकर भारत पर भी दबाव बनाए हुए हैं कि वह पाकिस्तान की सरकार को सीधे दोषी न ठहराए क्योंकि इससे ज़रदारी की सरकार कमज़ोर होती दिखती है
ज्योति मल्होत्रा, वरिष्ठ पत्रकार

वरिष्ठ पत्रकार और विदेश मामलों की जानकार ज्योति मल्होत्रा का भी कहना है कि भारत के रुख़ में जो नरमी दिखाई दे रही है उसकी वजह अमरीका और ब्रिटेन का दबाव नज़र आता है.

उनका कहना है, "इसके पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि अमरीका और ब्रिटेन चाहते हैं कि पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार को महत्व मिले और सेना का प्रभुत्व कम हो."

"अमरीका और ब्रिटेन इस बात को लेकर भारत पर भी दबाव बनाए हुए हैं कि वह पाकिस्तान की सरकार को सीधे दोषी न ठहराए क्योंकि इससे ज़रदारी की सरकार कमज़ोर होती दिखती है."

उनके अनुसार भारत ने खुले और पारदर्शी मुक़दमे की बात करके यह संकेत भी दिए हैं कि भारत सरकार चाहती है कि जो कुछ भी सरकार करे वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगरानी में भी हो.

राजनयिक रास्ता

 बजाय इसके कि सूचनाएँ मीडिया के ज़रिए मिले, मुझे ख़ुशी होगी यदि पाकिस्तान से सूचनाएँ मौजूदा राजनयिक रास्तों का उपयोग करते हुए सीधे मिलें
प्रणब मुखर्जी

पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा के अध्यक्ष रहमान मलिक ने कहा था कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई को लेकर पाकिस्तान गंभीर है और उसने 124 लोगों को गिरफ़्तार किया है और कई मदरसे बंद किए हैं.

मलिक ने जाँच में पूरा सहयोग देने की बात कही थी और भारत से मुंबई हमलों के बारे में और सबूत सौंपे जाने की मांग भी की थी.

उनके बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गुरुवार को विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि भारत ने पाँच जनवरी को ही पाकिस्तान के उच्चायुक्त को मुंबई हमलों से जुड़े सारे सबूत सौंप दिए थे और अब पाकिस्तान को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए.

मीडिया के ज़रिए आई जानकारी पर आपत्ति जताते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा, "बजाय इसके कि सूचनाएँ मीडिया के ज़रिए मिले, मुझे ख़ुशी होगी यदि पाकिस्तान से सूचनाएँ मौजूदा राजनयिक रास्तों का उपयोग करते हुए सीधे मिलें."

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