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'बेनज़ीर की हत्या की जल्द जाँच करेंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि 'जल्द' ही पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच की जाएगी. इस्लामाबाद में पाकिस्तान के अधिकारियों से बातचीत के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा,'' हम जल्द ही बेनज़ीर भुट्टो के हत्या की जाँच के लिए आयोग गठित करेंगे.'' हालांकि बान की मून ने ये स्पष्ट नहीं किया कि संयुक्त राष्ट्र की किस व्यवस्था के तहत ये जांच की जाएगी. इसके पहले दिसंबर में बान की मून के एक प्रवक्ता ने कहा था कि इस पर और विचार विमर्श किया जाएगा लेकिन "आयोग के कामकाज के तरीक़े, इसके खर्च, सूचनाओं तक पहुँच और आयोग की निष्पक्षता बनाए रखने के उपाय जैसे मुद्दों पर मोटे तौर पर सहमति बन गई है." ग़ौरतलब है कि 27 दिसंबर, 2007 को रावलपिंडी के लियाक़त बाग़ पार्क में एक रैली के बाद बेनज़ीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया था लेकिन अभी तक किसी को सज़ा नहीं सुनाई गई है. जाँच पर सवाल बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे थे. पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने हत्या के लिए अल-क़ायदा से जुड़े चरमपंथियों को दोषी ठहराया था और संयुक्त राष्ट्र से इसकी जाँच करवाने की माँग को ख़ारिज कर दिया था. हालांकि उन्होंने पाकिस्तान पुलिस की सहायता के लिए लंदन की पुलिस स्कॉटलैंड यार्ड को ज़रुर बुलवाया था. पाकिस्तान के जाँचकर्ताओं ने कहा था कि एक अकेले हमलावर ने ख़ुद को बम से उड़ाने से पहले गोलियाँ भी दागीं थीं लेकिन बेनज़ीर की मौत गोली लगने से नहीं हुई थी. बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने जाँच निष्कर्षों को ख़ारिज कर दिया था. पीपीपी ने हत्यारों की पहचान और इसके कारणों का पता लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से जाँच करवाने की माँग की थी. दो बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रह चुकी बेनज़ीर भुट्टो 1999 में परवेज़ मुशर्रफ़ के सत्ता संभालने के बाद से निर्वासित जीवन जी रही थीं. संसदीय और राज्यों के चुनावों में हिस्सा लेने के लिए अक्तूबर,2007 में वे पाकिस्तान लौटी थीं. उनके लौटने के तुरंत बाद कराची में उनके काफ़िले में हुए हमलों में सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी लेकिन इस हमले में वे बाल-बाल बच गईं थीं. लेकिन दिसंबर, 2007 में रावलपिंडी में हुए आत्मघाती हमले में उन्हें नहीं बचाया जा सका. उनके साथ 20 और लोगों की मौत हुई थी. |
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