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बेनज़ीर को मनावाधिकार सम्मान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो को संयुक्त राष्ट्र की ओर से मरणोपरांत सम्मानित किया गया है. बेनज़ीर भुट्टो को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित मानवाधिकार पुरस्कार या ह्यूमन राइट्स अवार्ड से नवाज़ा गया है. उन्हें यह सम्मान मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए किए गए उनके काम को देखते हुए दिया गया है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल में एक समारोह में बेनज़ीर भुट्टो के बेटे और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने यह पुरस्कार स्वीकार किया. बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने पुरस्कार लेने के बाद पत्रकारों को भी संबोधित किया. बेनज़ीर भुट्टो की मौत के बाद से बिलावल भुट्टो ने मीडिया से दूर ही रहे हैं और इस बार भी उन्होंने सिर्फ़ पुरस्कार के बारे में ही बात की. पुरस्कार लेते समय अपने भावों का ज़िक्र करते हुए बिलावल भुट्टो ने यह भी कहा कि वह बहुत खुश होते अगर उनकी मां खुद ही यह अवार्ड लेने आतीं. उन्होंने कहा, "पुरस्कार लेते समय मुझे खुशी और ग़म दोनों महसूस हुए. मेरी माँ को पुरस्कार से सम्मानित किया गया इससे खुशी हुई, लेकिन अगर वह खुद ही इसे लेने के लिए मौजूद होतीं तो बहुत खुशी होती.” पुरस्कार के लिए शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने अपनी माँ की आखिरी किताब –रेकंसिलिएशन, इस्लाम एंड द वेस्ट–के कुछ अंश पढ़कर सुनाए जिसमें बेनज़ीर ने पाकिस्तान लौटने का फ़ैसला करते हुए यह भी लिखा था कि उनकी जान को खतरा है. बिलावल से जब यह सवाल किया गया कि उनकी माँ के प्रधानमंत्री रहते हुए पाकिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया था, तो उनका कहना था, “मेरी मां जब प्रधानमंत्री थीं तो उनकी सरकार को बदनाम करने के मकसद से कुछ लोगों ने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया था, लेकिन मेरी मां ने किसी प्रकार का मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं किया था बल्कि उन्होंने तो मानवाधिकारों के लिए जो भी मुमकिन था किया था.” पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की पिछले वर्ष 27 दिसंबर को रावलपिंडी में एक रैली में हत्या कर दी गई थी. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में 10 दिसंबर के दिन मानवाधिकार पर यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्मूमैन राइट्स जारी किया था. इस साल इसी की साठवीं सालगिरह भी मनाई जा रही है. इसी मौक़े पर मानवाधिकार के लिए काम करने वालों को सराहने के मकसद से कई लोगों और संगठनों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने समारोह में बोलते हुए कहा कि दुनिया में मानवाधिकार के लिए काम करने वालों को सराहा जाना चाहिए. बेनज़ीर भुट्टो के अलावा अमरीका के पूर्व एटर्नी जरनल रैमज़ी क्लार्क और मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वाच भी मानवाधिकार पुरस्कार पाने वालों में शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र की ओर से मानवाधिकार से संबंधित पुरस्कार हर पाँच साल के अंतराल पर दिया जाता है. इस साल कुल सात लोगों को यह इनाम दिया गया है और उन्हें कुल 190 लोगों में से चुना गया था. |
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