|
दिल्ली में सुरक्षा मामलों पर शीर्ष बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली में शनिवार को शीर्ष स्तरीय बैठकों का दौर चलता रहा, प्रधानमंत्री ने भी इन बैठकों में हिस्सा लिया. मनमोहन सिंह ने अपने निवास सात रेस कोर्स रोड पर एक बैठक की अध्यक्षता की जिसमें सेना के तीनों अंगों के प्रमुख और रक्षा मंत्री सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए. दो घंटे चली इस बैठक में देश की सुरक्षा की स्थिति और तत्परता की गहन समीक्षा की गई. इस मीटिंग को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि अपनी सुरक्षा के लिए 'भारत सभी विकल्प खुले रख रहा है', ऐसी अटकलबाज़ियाँ तेज़ हो गई हैं कि भारत कहीं मुंबई के हमलों की प्रतिक्रिया में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ किसी तरह की सैनिक कार्रवाई की योजना तो नहीं बना रहा है. विदेश मंत्री ने दिल्ली में एक और सख़्त बयान दिया है जिसमें पाकिस्तान की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा है, "मुंबई में जिस तरह का हमला हुआ था उस तरह का हमला तभी हो सकता है जब उसके सूत्रधारों को सज़ा न मिलने का आश्वासन मौजूद हो." उन्होंने कहा है कि मुंबई हमले के सिलसिले में पकड़े गए चरमपंथी अजमल अमीर कसाब ने अपने हैंडलरों के बारे में सिहरन पैदा करने वाली जानकारियाँ दी हैं, उन्होंने मुंबई के हमलों को "ठंडे दिमाग़ से किया गया सुनियोजित हत्याकांड" करार दिया है. विकल्प इससे पहले शनिवार को ही केंद्रीय रक्षा मंत्री एके एंटनी ने अपने मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों और तटरक्षक बल के प्रमुख के साथ बैठक की थी जिसमें भारत की जलसीमा की सुरक्षा पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया. दिल्ली में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार और टेलीग्राफ़ समाचारपत्र की संपादक मानिनी चटर्जी का कहना है कि पिछले दो दिनों में दिल्ली में मूड काफ़ी बदला हुआ दिख रहा है और काफ़ी गहमागहमी दिख रही है. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "शनिवार को सरकारी दफ़्तर बंद रहते हैं लेकिन साउथ ब्लॉक में जहाँ रक्षा और विदेश मंत्रालय दोनों के दफ़्तर हैं वहाँ कई शीर्ष स्तर की बैठकें हुई हैं. लेकिन उन बैठकों में क्या हुआ है इसकी पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है." मानिनी चटर्जी का कहना है कि "रक्षा मंत्री एके एंटनी ने पहले कहा था कि सैनिक विकल्प कोई विकल्प नहीं है लेकिन अब लग रहा है कि भारत सरकार ने अपने घोषित रुख़ में बदलाव किया है और सैनिक विकल्प को खुला रखने का विचार बना है." प्रणव मुखर्जी ने कहा, 'अगर कोई देश आतंकवाद के बारे अपने आश्वासन पर कायम नहीं रह सकता तो भारत को अधिकार है कि अपने हितों और लोगों की सुरक्षा के लिए वह सभी विकल्प खुले रखे.' भारतीय सेना के तीनों अंगों को 26 नवंबर को मुंबई में हुए हमले के बाद से हाइ अलर्ट पर रखा गया है. इस बीच अमरीकी विदेश मंत्री कॉन्डोलिज़ा राइस ने कहा है कि पाकिस्तान ने कई सकारात्मक क़दम उठाए हैं लेकिन उन्होंने माना है कि वे क़दम पर्याप्त नहीं हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'युद्ध की स्थिति है और हम एक हैं'11 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस कसाब को हिरासत में रखने का आदेश11 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस कठोर कदमों का इंतज़ार करें: गृहमंत्री11 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'जमात लश्कर का अंग', नेताओं पर पाबंदी11 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस आतंकवाद के मुद्दे पर संसद में बहस10 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'भारत क़साब से मिलने की अनुमति दे'10 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस पाक प्रधानमंत्री ने हिरासत की पुष्टि की10 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस कसाब की कोर्ट में पेशी होगी आज10 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||