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'भारत क़साब से मिलने की अनुमति दे'
कसाब से भारतीय अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं
भारत के विदेश राज्य मंत्री ई अहमद ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि पाकिस्तान से अपनी गतिविधियाँ चलाने वाले चरमपंथी संगठन जमात-उल-दावा पर प्रतिबंध लगाया जाए.

भारत का कहना है कि जमात-उल-दावा कोई अलग संगठन नहीं है बल्कि लश्कर-ए-तैबा का ही छद्म रूप है.

इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के विशेष दूत हुसैन हारुन ने बीबीसी उर्दू सेवा के उमर आफ़रीदी से बातचीत की है.

क्या भारत की माँग को मानते हुए पाकिस्तान की सरकार जमात-उल-दावा या दूसरे किसी चरमपंथी संगठन पर पाबंदी लगाएगी?

पाकिस्तान कहता रहा है कि हमें सबूत दीजिए, हम जाँच करेंगे, हम मिल-जुलकर काम करेंगे, ख़ुफ़िया जानकारियाँ शेयर करेंगे. इसके बाद जाँच में अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ पाकिस्तान के क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जाएगी. पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी साहब ने भी यही कहा है कि अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ वही सुलूक होगा जो कि एक हत्यारे के ख़िलाफ़ होता है. जमात-उल-दावा हो या लश्कर हो, नाम से कुछ नहीं होता, जो भी दोषी पाया गया उस पर कार्रवाई होगी.

आप जो कह रहे हैं वह तो पाकिस्तान का अब तक का रुख़ रहा है, लेकिन भारत लगातार माँग कर रहा है कि इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाए. भारत में मोहम्मद अजमल अमीर कसाब नाम का जो व्यक्ति गिरफ़्तार किया गया है उसने बहुत सारी बातें स्वीकार की हैं. भारत ने अब संयुक्त राष्ट्र में मामले को उठा दिया है तो पाकिस्तान इस पर क्या करने वाला है?

आप बातें स्वीकार करने की बात कह रहे हैं, हम तो ये कह रहे हैं कि उस व्यक्ति को पाकिस्तानी कूटनयिकों से मिलने की अनुमति दी जाए (कौंसुलर एक्सेस) ताकि हम तस्दीक कर सकें कि वह पाकिस्तानी है भी या नहीं.

 हम तो ये कह रहे हैं कि उस व्यक्ति को पाकिस्तानी कूटनयिकों से मिलने की अनुमति दी जाए (कौंसुलर एक्सेस) ताकि हम तस्दीक कर सकें कि वह पाकिस्तानी है भी या नहीं
हुसैन हारून, पाकिस्तानी दूत

हमने पहले भी कहा है कि जो एंटी टेरर मैकेनिज़्म भारत और पाकिस्तान के बीच लागू है. भारत के कहने से कोई बात तब्दील नहीं हुई है, हम पहले भी इस मामले में कार्रवाई कर रहे हैं, आगे भी करेंगे.

लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जो मामला आया है उसके बारे में आप क्या कहेंगे?

ये जो दो नाम हैं इनकी जाँच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पहले ही कर रहा है. ये कोई भारत के कहने पर कल से शुरू नहीं हुआ है, यह जाँच कोई छह-आठ महीने से चल रही है, इस जाँच में अगर पाया गया कि ये संगठन ग़लत गतिविधियों में शामिल हैं तो संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुरूप कार्रवाई होगी.

यानी आप ये कह रहे हैं कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आपसे कहे कि इन संगठनों पर प्रतिबंध लागू किया जाए तो आप प्रतिबंध लागू करेंगे?

हमने यही कहा है कि ऐसी कोई भी गुज़ारिश आएगी तो हम उस पर ग़ौर करेंगे और उसके मेरिट के हिसाब से फ़ैसला करेंगे.

लोगों को ये पता है कि ये संगठन पाकिस्तान में सक्रिय हैं, अलग-अलग मौक़े पर मीडिया में इनके नाम आते रहे हैं, इनके ऊपर आरोप लगते रहे हैं. पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र का इंतज़ार करने की क्या ज़रूरत है, वह अपने स्तर पर जाँच करके कार्रवाई क्यों नहीं करता?

बिल्कुल जाँच हो रही है, कार्रवाई हो रही है. एंटी टेरर मैकेनिज्म के तहत हो रही है, ये काम तो इस्लाबाद के हैं लेकिन मुझे पता है कि का हो रहा है.

पाकिस्तान में अक्सर ऐसा देखा गया है कि चरमपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है लेकिन वे नाम बदलकर काम करते रहते हैं, क्या ऐसे किसी क़दम से फ़ायदा होगा?

आपका कहना सही है लेकिन पाकिस्तान के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और पाकिस्तान ख़ुद ही दहशतगर्दी का शिकार है. पाकिस्तान के ऊपर दबाव है कि वह ठोस कार्रवाई करे जो हम कर भी रहे हैं.

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