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शनिवार, 06 दिसंबर, 2008 को 17:53 GMT तक के समाचार
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समाज में बढ़ती हिंसा से प्रधानमंत्री चिंतित
मनमोहन सिंह (फ़ाइल फ़ोटो)
भारतीय प्रधानमंत्री ने शिक्षा के बाज़ारीकरण पर चिंता जताई
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारतीय समाज में जिस तरह का विभाजन, गुस्सा और हिंसा देखी जा रही है वैसा पहले कभी नहीं था.

उन्होंने शनिवार को शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि समाज में असहिष्णुता अस्वीकार्य स्तर तक बढ़ गई है.

उनका कहना था, "आज हम हिंसा में बढ़ोत्तरी देख रहे हैं जो अस्वीकार्य है. हमारा समाज ज़्यादा विभाजित, गुस्सैल और हिंसक प्रतीत हो रहा है."

अपने धर्म, संस्कृति और विचारों के अनुरूप जीवन गुजारने को हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार करार देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे की आस्था और मत से इनकार करने या उसमें दखलअंदाज़ी करने का हक़ किसी को नहीं है.

 हम एक प्राचीन और सहनशील संस्कृति से जुड़े हैं. हमें उन लोगों के प्रति सहनशीलता दिखानी होगी जो हमसे अलग सोचते हैं, किसी दूसरे धर्म में आस्था रखते हैं या अलग ज़ुबान बोलते हैं
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

वो कहते हैं, "हम एक प्राचीन और सहनशील संस्कृति से जुड़े हैं. हमें उन लोगों के प्रति सहनशीलता दिखानी होगी जो हमसे अलग सोचते हैं, किसी दूसरे धर्म में आस्था रखते हैं या अलग ज़ुबान बोलते हैं."

प्रधानमंत्री का कहना था कि लोकतांत्रिक राजनीति का सार यह है कि हमारे बीच भले ही मतभेद हों मगर फिर भी हमें साथ-साथ काम करना है.

महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर को शिक्षकों का शिक्षक बताते हुए उन्होंने कहा कि गुरुदेव की विरासत एक विश्वविद्यालय और पाठ्यक्रम के समान विस्तृत है जिससे विचारों में व्यापकता आती है, चरित्र का निर्माण होता है और वह छात्रों में जीवन के प्रति व्यापक नज़रिया विकसित करती है.

मनमोहन सिंह ने कहा, "हमारी उच्च शिक्षा इसे समझने में नाकाम रही है. यह युवकों और युवतियों को नौकरी के बाज़ार की जरूरतों के हिसाब से ढालने पर ही जोर देती है."

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