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मनमोहन ने बुलाई सर्वदलीय बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में चरमपंथी हमलों से उपजी परिस्थितियों पर विचार करने के लिए मनमोहन सिंह ने रविवार को दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के भाग लेने की संभावना है. मुंबई में 26 नवंबर की रात से शुरु हुए चरमपंथी हमले शनिवार को ख़त्म हुए जब कमांडो और सुरक्षाकर्मियों ने ताज होटल को चरमपंथियों के कब्ज़े से मुक़्त करवा लिया था. इन हमलों में कम से कम 195 लोगों की मौत हुई है जिसमें सुरक्षाकर्मी और विदेशी नागरिक शामिल हैं. तीन सौ से अधिक लोग घायल भी हुए हैं. केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत मिले हैं. हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस बात का खंडन किया है लेकिन हमलों की जाँच में हर तरह का सहयोग देने की बात कही है. बैठक भाजपा नेता और संसद में नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँग की थी कि चरमपंथ पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए. संभावना है कि इस बैठक में चरमपंथ से निपटने के उपायों पर चर्चा होगी.
विपक्षी दल चरमपंथ से निपटने के लिए पोटा जैसे सख़्त क़ानून की माँग करती रही है और सरकार का मत रहा है कि मौजूदा क़ानून ही इससे निपटने के लिए पर्याप्त हैं. संभावना है कि इस बैठक में यह मुद्दा एक बार फिर उठेगा. पिछले ही हफ़्ते प्रधानमंत्री ने राज्यों से चरमपंथ से निपटने के लिए विशेष टास्क फ़ोर्स बनाने की सलाह दी थी और देश की सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियों को ज़्यादा चौकस होकर काम करने की सलाह दी थी. अमरीकी एजेंसी एफ़बीआई की तर्ज़ पर एक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी बनाए जाने का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है. जानकार लोगों को मानना है कि इस बैठक में इस पर भी चर्चा हो सकती है. सर्वसम्मति की कोशिश मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद देश में सुरक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने एक बार फिर चरमपंथ से निपटने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और राजनीतिक सर्वसम्मति का सवाल उठाया है. मीडिया से हुई बातचीत में आम नागरिकों ने भी राजनीतिज्ञों को आड़े हाथ लिया है और कहा है कि राजनीतिक दल सिर्फ़ वोट बैंक की राजनीति करते हैं. ऐसे में इस सर्वदलीय बैठक की कोशिश होगी कि चरमपंथ से निपटने के लिए राजनीतिक सर्वसम्मति क़ायम की जा सके. हालांकि इस बैठक के एक दिन पहले दिल्ली में हुए चुनावों में भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों का खुला दौर चला है और कांग्रेस-भाजपा दोनों ने ही इसे चुनावी मुद्दा बनाया है. इन हमलों के बाद वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले के बाद हुई राजनीतिक सर्वसम्मति बनाने की कोशिशों की भी चर्चा निकली है और विश्लेषकों ने खुलकर कहा है कि देश के राजनीतिक दलों में इच्छाशक्ति की कमी दिखती है. |
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