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'भारतीय तंत्र पूरी तरह विफल रहा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई हमलों के लिए चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है. बाहर से उसे आईएसआई की मदद मिल रही है. स्थानीय स्तर पर भी उसे मदद मिल रही है. मेरा मानना है कि इसका पहले पहले बाक़ायदा सर्वेक्षण किया गया होगा कि कहाँ क्या है, उसके बाद इतने बड़े हमले को अंजाम दिया जा सकता था. समुद्री रास्ते से बिना किसी की मदद के हमलावर मुंबई में दाखिल नहीं हो सकते थे. 'विफल हुआ तंत्र' यह राजनीतिक तंत्र की विफलता है. नेताओं में ऐसे तत्वों के ख़िलाफ़ लड़ने की मंशा ही नहीं है. गुप्तचर विभाग, राज्य पुलिसबल और तटरक्षक बलों में से किसी ने भी अपनी ज़िम्मेदारी को ठीक से नहीं निभाया. किसी को भनक तक नहीं लगी कि क्या हो रहा है, ये पूरे तंत्र की विफलता है. सरकार को क़ानून और संविधान के आधार पर काम करना चाहिए. लेकिन हमारा देश आज भी धर्म, वर्ण और श्रेणी के आधार पर चलाया जा रहा है. देश के हालात ख़राब हैं और निरंतर बदतर होते जा रहे हैं. इसका समाधान संभव है क्योंकि ख़ुफ़िया तंत्र में क्षमता है लेकिन राज्य पुलिस तंत्र कमजोर है. राज्य पुलिस तंत्र औप केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों में तालमेल का अभाव है, ऊपर से राजनीतिक हस्तक्षेप ज़बर्दस्त है. दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार का तंत्र प्याज की तरह है, छिलके के अंदर छिलका और उसके अंदर क्या है, उनके विदेश मंत्री को भी नहीं पता होता कि किस योजना को अंजाम दिया जा रहा है. (रेणु अगाल से बातचीत पर आधारित) |
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