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रविवार, 07 दिसंबर, 2008 को 10:32 GMT तक के समाचार
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'भारत ने धमकी भरा फ़ोन नहीं किया'
 प्रणर्व मुखर्जी और शाह महमूद कुरैशी
प्रणर्व मुखर्जी के अनुसार उनकी ज़रदारी से आख़िरी और अकेली बातचीत मई 2008 में हुई थी
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने स्पष्टीकरण दिया है कि उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी को फ़ोन कर पाकिस्तान पर हमला करने की धमकी नहीं दी थी.

भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ़ से जारी एक बयान में मुखर्जी ने कहा, "हमें किसी दूसरे देशों के मित्रों ने बताया कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति समझते है कि मुंबई हमलों के बाद 28 नवंबर को मेरी तरफ़ से उन्हें धमकी भरी कॉल गई थी. मैं उन मित्रों और पाकिस्तानी अधिकारियों को स्पष्ट कर चुका हूँ कि मेरी तरफ़ से ऐसी कॉल नहीं गई थी."

उनका कहना था, "राष्ट्रपति ज़रदारी से मेरी आख़िरी और एकमात्र बातचीत मई 2008 में इस्लामाबाद दौरे के दौरान हुई थी."

दुख भरी बात

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि ये दुख भरी बात है कि पड़ोसी देश ने उस नक़ली कॉल के आधार पर कार्रवाई के बारे में भी सोचा और ख़बर को आंशिक रूप से रिलीज़ करके जनता को भ्रम में डाल दिया.

 राष्ट्रपति ज़रदारी से मेरी आख़िरी और बातचीत मई 2008 में इस्लामाबाद दौरे के दौरान हुई थी
प्रणर्व मुखर्जी

उनका कहना था," मैं इस घटना पर बस इतना ही कह सकता हूँ कि ये ख़बर फैला कर पाकिस्तान उस बात से ध्यान हटाना चाहता है कि पाकिस्तान स्थित चरमपंथी समूह ने मुंबई हमलों को अंजाम दिया था."

ग़ौरतलब है कि इससे पहले लंदन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त वाजिद शम्सुल हसन आरोप लगाया था कि मुंबई में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में सैनिक कार्रवाई करने की धमकी दी थी.

कॉल फ़र्ज़ी नहीं थी

शम्सुल हसन का कहना था कि भारत की ओर से हमले की आशंका को देखते हुए पाकिस्तानी अधिकारियों ने आनन-फानन में अमरीकी और ब्रितानी सरकारों से संपर्क साधा जिन्होंने हस्तक्षेप करके स्थिति को संभाला.

 ये फ़र्ज़ी कॉल नहीं थी, कॉलर की पहचान मालूम होने के बाद उसे राष्ट्रपति को मिलाया गया था, फ़ोन भारतीय विदेश मंत्रालय से आया था. यह कह देना कि हमने फ़ोन नहीं किया था यह फ़िज़ूल बात है
वाजिद शम्सुल हसन

पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने बीबीसी उर्दू सेवा से बातचीत में कहा था, "ये फ़र्ज़ी कॉल नहीं थी, कॉलर की पहचान मालूम होने के बाद उसे राष्ट्रपति को मिलाया गया था, फ़ोन भारतीय विदेश मंत्रालय से आया था. यह कह देना कि हमने फ़ोन नहीं किया था यह फ़िज़ूल बात है."

दूसरी तरफ़ इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा था कि भारत की ओर से ऐसा कोई फ़ोन नहीं किया गया था.

भारतीय अधिकारी का कहना था कि पाकिस्तानी पक्ष से एक ही बार बात हुई थी जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी दिल्ली में थे और वह बातचीत बहुत ही सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में हुई थी.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रतिष्ठित समाचारपत्र 'द डॉन' ने शीर्षस्थ सूत्रों के हवाले से एक समाचार प्रकाशित किया था जिसमें कहा गया था कि ख़ुद को प्रणव मुखर्जी बताने वाले एक व्यक्ति ने राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी को फ़ोन करके कहा था कि अगर चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई तो भारत सैन्य शक्ति का प्रयोग करेगा.

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