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'भारत ने कोई पुख़्ता सबूत नहीं दिए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद जहाँ भारत-पाक रिश्तों में ख़ासा तनाव पैदा हो गया है वहीं पाकिस्तान ने कहा है कि भारत ने उसे कोई पुख़्ता सबूत नहीं सौंपे हैं. हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान में सक्रिय कुछ तत्वों पर उँगली उठाई थी और दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को बुलाकर माँग की थी कि पाकिस्तान में मौजूद उन 20 लोगों को गिरफ़्तार कर भारत को सौंपा जाए जिनके ख़िलाफ़ भारत में क़ानूनी कार्रवाई चल रही है. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया और पाकिस्तान ने न केवल संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून और सदस्य देशों को पत्र लिखा है बल्कि प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी ने एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई. बुधवार को मीडिया ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के हवाले से ख़बर दी कि वे मानते हैं कि उनके देश को कोई सबूत नहीं दिए गए. 'अपनी अदालत में मुकदमा चलाएँगे' मीडिया के अनुसार ज़रदारी का कहना था, "भारत ने कोई पुख़्ता सबूत नहीं दिए हैं. इस बात के सबूत भी नहीं दिए गए हैं कि जो व्यक्ति पकड़ा गया है वह पाकिस्तानी नागरिक है... हो सकता है कि वह पाकिस्तानी नागरिक न हो..यदि सबूत मिलगा तो हम उनके ख़िलाफ़ अपनी अदालतों में मुकदमा चलाएँगे." पाकिस्तान की सूचना मंत्री शेरी रहमान ने कहा, "राष्ट्रपति ज़रदारी ने कूटनीतिक प्रक्रिया और स्थिति सामान्य होने से रोकने का कोई काम नहीं किया. समझना चाहिए कि नागरिकों को किसी अन्य देश को सौंपनें की एक लंबी प्रक्रिया होती है...यदि पुख़्ता सबूत मिलते हैं तो सरकार कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगी." पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी पहले ही कह चुके हैं, "भारत ने चरमपंथी संगठन और ये कहाँ स्थित हैं, इस बारे में जानकारी दी है लेकिन कोई सबूत पेश नहीं किया है. लश्करे तैय्यबा काफ़ी बड़ा संगठन है...भारत वहाँ मुश्किलें झेल रहा है, हम यहाँ मुश्किल में हैं. हमें संयुक्त तौर पर उग्रवाद का सामना करना चाहिए. आरोप-प्रत्यारोप से दुनिया का ही नुकसान होगा." |
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