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'भाजपा को माफ़ी माँगनी चाहिए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का कहना है कि संसद पर हमले के लिए तात्कालिक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ज़िम्मेदार है इसलिए उस वक़्त के गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी को संसद में खड़े होकर माफ़ी माँगनी चाहिए. कपिल सिब्बल के अनुसार राष्ट्रीय जनतात्रिक गठबंधन की सरकार ने 1999 में जिन पाकिस्तानी चरमपंथियों को कंधार में जा कर छोड़ा था उन्ही चरमपंथियों ने संसद पर हमला किया था. बुधवार को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी विधेयक पर बहस के दौरान सिब्बल का कहना था, "संसद पर हमला जैश-ए-मोहम्मद के नेता अज़हर मसूद ने कराया था और उन्हें भाजपा की सरकार ने कंधार ले जा कर छोड़ा था इसलिए भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को संसद में खड़े हो कर माफ़ी माँगनी चाहिए." ग़ौरतलब है कि 1999 में एक विमान के अग़वा किए जाने के बाद तात्कालिक गठबंधन की सरकार ने चरमपंथियों की माँग को मानते हुए भारत में क़ैद तीन पाकिस्तानी चरंपथियों अज़हर मसूद, उमर शेख और एक अन्य को कंधार में ले जा छोड़ा था. विमान में 200 से अधिक लोगों को कुछ चरमपंथियों ने बंधक बना रखा था. कांग्रेस सख़्त है आडवाणी पर सिब्बल ने प्रहार करते हुए कहा कि सभी चीज़ें स्थिर नहीं होती बल्कि बदलती रहती है और ऐसे में क़ानून भी बदलते रहते हैं. उन्होने दावा किया कि उनकी सरकार चरमपंथियों से निपटने के मामले में पहले ही से सख़्त है और इसलिए 90 के दशक कांग्रेस ने टाडा क़ानून बनाया था. सिब्बल से पहले बोलते हुए आडवाणी ने संसद में कहा था कि काग्रेंस दस साल बाद उनकी बात को मान रही है और अब क़ानून बना रही है जबकि वो पहले से ही ऐसा कहते रहे हैं. पोटा की ख़ामियों का ज़िक्र करते हुए सिब्बल ने कहा कि पिछले छह सालों से गोधरा कांड में हिरासत में लिए गए 100 से अधिक लोगों को अभी तक ज़मानत नहीं मिली है. सिब्बल ने नए क़ानून को संतुलित बताते होते हुए कहा कि इसमें तमाम सेफ़गार्ड दिए गए है. कड़े क़ानून की कमी की बात करने पर भापजा पर प्रहार करते हुए सिब्बल ने कहा कि देश में कड़े कानून है और मौजूदा सरकार 'आतंकवाद' से सही ढंग से निपट नहीं रही है. उनका कहना था कि भाजपा 'आतंकवाद' के मामलों पर केवल राजनीति करती है. उन्होंने बताया कि अमरीका में हिरासत की अवधि एक बार में सिर्फ़ सात दिनों तक है और ब्रिटेन में किसी को 28 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है, जबकि भारत में पहले ही से किसी को अधिकतम 90 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है, और अब नए क़ानून के तहत 180 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें संघीय जाँच एजेंसी पर संसद में बहस 16 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नए क़ानून बनाने की योजना है: सोनिया16 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता लेकिन...'16 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस भारत का वायुसीमा उल्लंघन से इनकार14 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'हमला हुआ तो मुँहतोड़ जवाब देंगे'15 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'पाकिस्तान पर हमले की योजना नहीं'16 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस मुंबई: कई इलाकों में अचानक हुआ हमला27 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस हमले देश के लिए चुनौती हैं: आडवाणी27 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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