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'पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता लेकिन...' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है, "पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता लेकिन हम देशवासियों को आश्वासन देना चाहते हैं कि यदि ये हम पर थोपा जाता है तो हम एक ग़ैरतमंद क़ौम की तरह एक साथ खड़े हो जाएँगे." गिलानी ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली मंगलवार को एक विशेष सत्र में मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुई स्थिति पर चर्चा कर रही है. गिलानी का कहना था, "पाकिस्तान एक ज़िम्मेदार देश है, परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है और हम सभी की मिलकर पाकिस्तान की अखंडता की रक्षा करनी चाहिए. हम एकजुट हैं और हमारी सेनाएँ पूरी तरह तैयार हैं." आतंकवाद की निंदा गिलानी का कहना था कि पाकिस्तान की सेना, सरकार, सैन्य और नागरिक अफ़सरशाही सभी इन तनावपूर्ण परिस्थितियों में एकजुट हैं. उनका कहना था, "पाकिस्तान आतंकवाद की निंदा करता है और पूरी दुनिया को विश्वास दिलाता है कि वह अपनी भूमि को आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा." पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का कहना था कि पाकिस्तान बचाव की मुद्रा में नहीं है लेकिन सुरक्षा परिषद में जमात-उद-दावा का नाम आने पर पाकिस्तान पर नैतिक ज़िम्मेदारी ज़रूर आ गई थी. उनका कहना था कि पाकिस्तान के अनेक अंतरराष्ट्रीय दोस्तों के ज़रिए भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव घटाने की कोशिश की गई है. गिलानी का कहना था कि अमरीका, ब्रिटेन, तुर्की, चेक गणराज्य और गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल से तनाव घटाने में सहयोग लिया गया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से पाकिस्तानी संगठन जमात-उद-दावा को लश्करे तैबा का एक अंग बताकर उस पर प्रतिबंध लगाए जाने पर गिलानी का कहना था कि जो भी पाबंदियाँ लगाई जाती है वे सभी देशों में लागू होती हैं और ये केवल पाकिस्तान के लिए नहीं है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री गिलानी का कहना था, "सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 'होल्ड' पर था. लेकिन इसके बावजूद जिन शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संस्थानों को जमात-उल-दावा चला रहा था, सरकार उनके बोर्ड पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त करेगी और उन्हें चलाएगी." |
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