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कड़े और असरदार क़दम उठाए पाक: राइस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई हमलों के संदर्भ में दक्षिण एशिया के दौरे पर आईं अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि पाकिस्तान को 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़े और असरदार कदम' उठाने होंगे. भारत में बुधवार को मंत्रियों और नेताओं से मिलने के बाद अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस गुरुवार को पाकिस्तान पहुँची हैं. उनकी दक्षिण एशिया यात्रा का मक़सद मुंबई धमाकों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव को घटाना है. वे इस्लामाबाद में उच्चस्तर पर राजनीतिक और सैन्य नेताओं से मिलेंगी. दिल्ली से इस्लामाबाद जाते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा, "पूरी दुनिया में उग्रवाद और आतंकवाद के ख़तरे का सभी देशों को मिलकर कड़े क़दम उठाते हुए मुकाबला करना है. मैं इसी विषय पर चर्चा करने आई हूँ." समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान कड़े और असरदार क़दम उठाए. वे भारत में पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि बम धमाकों के सिलसिले में ‘पाकिस्तान पर विशेष ज़िम्मेदारी है कि वह पारदर्शिता बरते और भारत को सहयोग दे.' जहाँ भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि भारत के सभी विकल्प खुले हैं वहीं पाकिस्तान में सभी राजनीतिक दलों ने सर्वदलीय बैठक कर राजनीतिक स्तर पर एकजुटता का प्रदर्शन किया है. 'अल क़ायदा ऐसे हमलों का भाग रहा' पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी पहले ही कह चुके हैं कि भारत ने एक चरमपंथी को पकड़ने की बात तो की है और पाकिस्तान पर उँगली उठाई है लेकिन उसने उसे कोई पुख़्ता सबूत नहीं सौंपे हैं. इस बयान से भारत नाराज़ है. बुधवार को भारत में पत्रकारों से बात करते हुए राइस ने कहा था, "पाकिस्तान को दृढ़ता से और तत्काल कार्रवाई करने और पारदर्शिता से भारत के साथ सहयोग करने की ज़रूरत है. ये संदेश दिया जा चुका है और दोबारा पाकिस्तान में भी दिया जाएगा. इस समय उन सभी लोगों को सहयोग करने की ज़रूरत है जो आतंकवादी हमलों से पीड़ित हैं." अल क़ायदा पर पूछे गए एक सवाल के जबाव में राइस का कहना था, "चाहे सीधे तौर पर (मुंबई हमलों में) अल क़ायदा का हाथ है या नहीं है, लेकिन इस तरह के आतंकवाद में अल क़ायदा शामिल रहा है." भारत में राइस का कहना था, "इसका मक़सद केवल आतंक फैलाना नहीं बल्कि संदेश देना होता है कि लोग सुरक्षित नहीं हैं, व्यवसायिक प्रतिष्ठान सुरक्षित नहीं हैं, आर्थिक केंद्र सुरक्षित नहीं हैं. हमनें ये न्यूयॉर्क में देखा है. हम किसी फ़ैसले पर नहीं पहुँच रहे हैं लेकिन अमरीका सक्रिय तौर पर सूचना का आदान-प्रदान कर रहा है." 'दृढ़ता से कार्रवाई होगी' उधर भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, "भारत की अखंडता और नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार की रक्षा करने के लिए भारत सरकार दृढ़ता के कार्रवाई करेगी. हम आतंकवाद के साथ इस लंबी लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहयोग चाहते हैं." पाकिस्तान राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने बयान दिया था कि हमलावरों को किसी सरकार का समर्थन हासिल नहीं था. राइस ने कहा, "तख्य ये हैं कि सरकार के समर्थन न होने पर भी ऐसे लोग किसी देश की भूमि से कार्रवाई करते हैं और इनके ख़िलाफ़ कड़ी और सीधी कार्रवाई होनी चाहिए. यही असल मुद्दा है. जाँच चल रही है और देखते हैं कि तथ्य हमें कहाँ ले जाते हैं. |
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