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सोमवार, 17 नवंबर, 2008 को 02:52 GMT तक के समाचार
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सुरक्षा के बीच जम्मू कश्मीर में मतदान

नक्शा
भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में सात चरणों में मतदान होना है
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के पहले चरण के मतदान के दौरान पुंछ ज़िले में पांच अधिकारियों को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए पाया गया और उन्हें तत्काल हटा दिया गया है.

पुंछ के उपायुक्त मोहम्मद अफ़ज़ल बट ने बताया कि ये चारों अधिकारी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार रफ़ीक हुसैन खान के रिश्तेदार के घर में ठहरे हुए थे जो ग़लत है.

बट के अनुसार आचार संहिता की धारा 141 के तहत ये आचार संहिता का उल्लंघन है. इन चारों अधिकारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है और इनके स्थान पर नए अधिकारियों को नियुक्त कर दिया गया है.

जम्मू-कश्मीर
विधानसभा क्षेत्र- 87
मतदान की तारीखें
17 नवंबर---- 10 सीटें
23 नवंबर-----6 सीटें
30 नवंबर-----5 सीटें
07दिसंबर------18 सीटें
13दिसंबर-------11 सीटें
16दिसंबर----16 सीटें
24 दिसंबर---21 सीटें
मतगणना---- 28 दिसंबर

जम्मू कश्मीर में सोमवार को चार ज़िलों की 10 सीटों के लिए मतदान हो रहा है. ये ज़िले हैं पुँछ, बांदीपुरा, करगिल और लेह.

इन जगहों पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं और सिर्फ़ पुँछ में ही अर्धसैनिक बलों की 80 कंपनियाँ तैनात की गई हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बांदीपुरा और सोनावाड़ी विधानसभा क्षेत्रों में लोग मतदान के लिए घरों से निकल रहे हैं और ख़राब मौसम के बावजूद मतदान की गति अच्छी है.

दूसरी ओर अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार की अपील का कश्मीर घाटी में असर नज़र नहीं आ रहा है.

जम्मू कश्मीर में सात चरणों में मतदान होना है. जिन दस विधानसभा क्षेत्रों के लिए मत डाले जा रहे हैं,वे हैं - पुँछ-हवेली, सूरनकोट, मेंधर, गुरेज़, बांदीपुरा, सोनावाड़ी, नोबरा, लेह, करगिल, और जांस्कार.

इन सीटों के 1038 केंद्रों पर छह लाख से ज़्यादा मतदाताओं के वोट डालने का प्रावधान किया गया है.

इन चुनाव क्षेत्रों में 102 उम्मीदवार मैदान में हैं और सबसे ज़्यादा 22 उम्मीदवार सोनावाड़ी में हैं.

चुनाव का बहिष्कार भी

चुनाव- 2002, कुल: 87 सीटें
नेशनल कॉन्फ़्रेंस 28
कांग्रेस 20
पीडीपी 16
पैंथर्स पार्टी 4
भाजपा 1
बसपा 1
अन्य 17

बीबीसी के श्रीनगर संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार जुलाई-अगस्त में 'आज़ादी' के समर्थन में हुए प्रदर्शनों और हिंसक प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अलगाववादी गुटों की चुनाव बहिष्कार की घोषणा के कारण कश्मीर घाटी में चुनाव प्रचार ढीला ही रहा है.

चुनाव का बहिष्कार अलगाववादी संगठन ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस और कुछ अन्य नेताओं ने किया है.

उनका मानना है कि बिना कश्मीर समस्या के हल के क्षेत्र में शांति बहाल नहीं हो सकती और चुनाव केवल ध्यान बाँटने का षड्यंत्र हैं.

अधिकतर अलगाववादी नेता या तो नागरिक सुरक्षा क़ानून के तहत गिरफ़्तार हैं या फिर नज़रबंद हैं.

चुनावी मुद्दे

राजनीतिक मुख्यधारा की पार्टियों में नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने बेरोज़गारी दूर करने और मृत चरमपंथियों के परिवारों को मदद देने का वादा किया है.

 हमने सभी ज़िला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि हमे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी 'स्वशासन और ग्रेटर जम्मू-कश्मीर' का मुद्दा उठाया है.

उधर कांग्रेस ने विकास, पारदर्शी प्रशासन और युवाओं की बेरोज़गारी के मुद्दे उठाए हैं और भारतीय जनता पार्टी ने अनुच्छेद 370 पर ज़्यादा कुछ न कहते हुए जम्मू-कश्मीर के हिंदू बहुल क्षेत्र के साथ कथित भेदभाव के मसले उठाए हैं.

चुनाव आयोग की तैयारी

दूसरी ओर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालास्वामी ने कहा है कि सुरक्षा बलों को चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह का दख़ल देने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

उनका कहना था, "हमने सभी ज़िला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि हमे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा."

उन्होंने कहा, "हमने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने पर बल दिया है. चुनाव प्रक्रिया में किसी पुलिसकर्मी या सैन्य अधिकारी को दख़ल देने की इजाज़त नहीं होगी."

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