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शुक्रवार, 25 अप्रैल, 2008 को 14:20 GMT तक के समाचार
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चुनावी साल में कश्मीर पैकेज
डॉक्टर मनमोहन सिंह
प्रधानमंत्री ने विस्थापित परिवारों की वापसी पर ख़ास ध्यान दिया है
भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर में साल 2008 में प्रस्तावित चुनावों के मद्देनज़र एक आकर्षक पैकेज की घोषणा की है जिसमें कश्मीरी मुसलमानों, सिखों और कश्मीरी पंडितों का दिल जीतने की कोशिश की गई है.

भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने जम्मू क्षेत्र के सीमावर्ती शहर अखनूर में शुक्रवार को एक रैली को संबोधित करते हुए इस आर्थिक पैकेज की घोषणा की. इस रैली में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद भी मौजूद थे.

ग़ौरतलब है भारत प्रशासित कश्मीर (जम्मू-कश्मीर) में कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की गठबंधन सरकार है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस आर्थिक पैकेज के तहत कुछ नौकरियाँ देने, विस्थापित परिवारों की मासिक राहत राशि और पेंशन बढ़ाने और विस्थापित परिवारों को राज्य में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भी कुछ योजनाओं की घोषणा की है.

उन्होंने मौजूद मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद और पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद मुफ़्ती मोहम्मद सईद की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं ने जम्मू कश्मीर के टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए उल्लेखनीय काम किया है.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ख़ुशी जताई कि राज्य के लोग शिक्षा, कृषि, बागबानी, सड़कों, ऊर्जा, दूर संचार और पर्यटन के क्षेत्रों में काफ़ी सुधार आया है और तरक्की हुई है जिसके लिए राज्य के लोग बधाई के पात्र हैं.

चरमपंथी हिंसा का प्रभाव

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों का कोई सदस्य चरमपंथी हिंसा में मारा गया है उनके निकट संबधी को सरकारी नौकरी देने के बहुत से मामले अभी पूरे नहीं हुए हैं.

एक कश्मीरी महिला

उन्होंने कहा, "इसकी एक वजह ये भी है कि इतनी सारी सरकारी नौकरियाँ उपलब्ध ही नहीं हैं. बहुत से ऐसे परिवार भी हैं जिनके ये निकट संबंधी बहुत सा ढीलापन देने के बाद भी नौकरी पाने की शर्तें पूरी नहीं करते हैं और अगर नौकरी की शर्तें बहुत ढीली कर दी जाएँ तो ऐसा सरकारी अमला तैयार हो जाएगा जो उत्पादक कार्य ठीक तरह से नहीं कर पाएगा."

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि इन हालात को देखते हुए हर ऐसे व्यक्ति को पाँच-पाँच लाख रुपए की मुआवज़ा राशि दी जाएगी जिसने चरमंपथी हिंसा में अपना निकट संबंधी खोया है. यह राशि पाने के बाद उस व्यक्ति का नौकरी पाने का अधिकार ख़त्म हो जाएगा.

विधवाओं की पेंशन भी बढ़ाकर 750 रुपए प्रतिमाह करने की घोषणा की गई है और अनाथ बच्चों को सहायता देने के कार्यक्रम का दायरा बढ़ाया जाएगा जिसमें बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चों को सहायता दी जाएगी.

घर को वापसी

प्रधानमंत्री ने कहा, "जम्मू कश्मीर की परंपरा विभिन्न आस्थाओं वाले लोगों में मेलजोल की रही है लेकिन पिछले क़रीब दो दशकों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की वजह से लगभग 55 हज़ार परिवार कश्मीर घाटी में अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और हमारी सबकी ज़िम्मेदारी बनती है कि इन उजड़े हुए परिवारों को फिर से उनके घर बसाया जाए जो राज्य की."

घर बसाया जाए
 जम्मू कश्मीर की परंपरा विभिन्न आस्थाओं वाले लोगों में मेलजोल की रही है लेकिन पिछले क़रीब दो दशकों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की वजह से लगभग 55 हज़ार परिवार कश्मीर घाटी में अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और हमारी सबकी ज़िम्मेदारी बनती है कि इन उजड़े हुए परिवारों को फिर से उनके घर बसाया जाए जो राज्य की.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

चरमपंथी गतिविधियों की वजह से कश्मीर घाटी से विस्थापित होने वाले बहुत से परिवारों को अपने मकान और संपत्ति औने-पौने दामों पर बेचने पड़े थे और यह सिलसिला तब तक जारी रहा जब 1997 में सरकार ने एक क़ानून बनाकर इस पर रोक लगाई.

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार से कहा गया है कि वह ऐसे विस्थापित परिवारों के लिए ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बनाने और ज़मीन मुहैया कराने के विकल्पों पर विचार करे. उन्होंने कहा, "सरकार उन परिवारों को नए घर बनाने या घर ख़रीदने के लिए एकमुश्त साढ़े सात लाख रुपए तक की राशि देगी जो घाटी को लौटना चाहते हैं."

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार ऐसे विस्थापित परिवारों को भी इसी तरह की एकमुश्त राशि देने पर विचार कर रही है घाटी में जिनके घर पूरी तरह से टूट-फूट चुके हैं या उन्हें आंशिक रूप से नुक़सान पहुँचा है, "सरकार शुरूआती ख़र्च भी उठाएगी और उनके लौटने की प्रक्रिया में मदद भी करेगी."

उन्होंने कहा कि जम्मू और दिल्ली में रहने वाले विस्थापित कश्मीरी परिवारों को जो 15 हज़ार रुपए की मासिक राशि दी जा रही है यह राशि इन परिवारों को वापिस लौटने पर भी दो साल तक जारी रहेगी.

नौकरियाँ

प्रधानमंत्री ने घोषणा की राज्य सरकार विस्थापित परिवारों को योग्य युवकों को नौकरी देने के लिए छह हज़ार पदों पर भर्ती करेगी, "इसमें राज्य सरकार की मदद करने के लिए लगभग तीन हज़ार पदों के वेतन का ख़र्च तब तक उठाएगी जब तक कि राज्य सरकार इन लोगों को एक समय सीमा के दायरे में पदों पर नियमित नहीं कर देती है."

उन्होंने कहा कि सरकार विस्थापित परिवारों के अन्य बेरोज़गार युवकों के लिए भी आर्थिक पैकेज मुहैया कराने पर विचार कर रही है ताकि वे अपना कोई रोज़गार शुरू कर सकें. इसके तहत ऐसे युवकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. सरकार कश्मीरी विस्थापितों के ऐसे क़र्ज़ पर ब्याज को भी माफ़ करने पर विचार कर रही है जो वे अदा नहीं कर सके हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रस्तावों पर कुल 1600 करोड़ रुपए ख़र्च होने का अनुमान है और ये लाभ सभी विस्थापित परिवारों के लिए उपलब्ध होंगे जिनमें कश्मीरी पंडित, मुस्लिम और सिख भी शामिल हैं जिन्हें 1989 में अपना घर और सामान पीछे छोड़कर ही भागना पड़ा था.

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ बहुत बड़ी हैं और इनका मुक़ाबला करने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा.

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