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एक 'चरमपंथी' से मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आसपास बिखरी भीड़ पर टिकी उसकी सतर्क आँखें और चेहरे पर खिंचा तनाव बता रहा था कि उसे अपनी ज़िम्मेदारी का कितना गहरा एहसास है. लाहौर के मीनार-ए-पाकिस्तान मैदान में विपक्षी पार्टियों की एक रैली के दौरान उससे मेरी मुलाक़ात हुई. मंच के नीचे सीढ़ियों पर तैनात फ़ौजी पतलून पहने वो नौजवान ऊपर जाने वाले हर आदमी की तलाशी ले रहा था. सुरक्षित माहौल में आदमी जिस लापरवाही से बात करता है, लगभग उसी लापरवाह अंदाज़ में उसने मुझे अपना नाम बताया," हाफ़िज़ ज़ाहिद मुजाहिद. मैं हिज़्बुल मुजाहिदीन में हूँ. हमारा काम बॉर्डर पर लॉन्च होना है." उसकी बात समझने में मुझे दो पल लगे और फिर जब बात समझ में आई तो मैंने सवाल किया- कश्मीर बॉर्डर पर? जवाब आया- जी हाँ, हम खोइरा टाट मक़ाम पर तैनात हैं. लाउड स्पीकरों पर जारी राजनीतिक भाषणों के शोर-शराबे के बीच हाफ़िज़ ने बताया कि उन्हें और हिज़्बुल मुजाहिदीन के दूसरे लड़ाकों को रैली में वॉलंटियर ड्यूटी करने के लिए बुलाया गया है. हिज़्बुल मुजाहिदीन मंच के चारों ओर क़दम-क़दम पर सिर पर सफ़ेद पट्टियाँ बाँधे वॉलंटियर्स तैनात थे. इन पट्टियों पर उर्दू में लिखा था– हिज़्बुल मुजाहिदीन. चरमपंथी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन का गठन भारतीय कश्मीर में हथियारबंद संघर्ष चलाने के लिए किया गया था. भारत में इस संगठन पर पाबंदी है और इसके लड़ाके भारतीय फ़ौज पर हमले करते हैं. हाफ़िज़ ज़ाहिद मुजाहिद उन पाकिस्तानी नौजवानों में से है जिन्हें हिज़्बुल मुजाहिदीन भारत प्रशासित कश्मीर में लड़ने के लिए छापामार युद्ध की ट्रेनिंग देता है. हाफ़िज़ ज़ाहिद ने बताया कि उसका बड़ा भाई भी कश्मीर में 'लॉन्च' हो चुका है. लेकिन वो हिज़्बुल मुजाहिदीन नहीं बल्कि लश्करे तैयबा का सदस्य है. "हमसे बड़ा भाई लश्करे तैयबा की तरफ़ से लॉन्च हुआ है और मैं भी इंशा अल्लाह उनके बाद वहाँ लॉन्च होने को तैयार हूँ." हाफ़िज़ की आवाज़ से उसका उत्साह झलक रहा था. उन्होंने कहा, "हम इस्लाम के लिए मरने को एकदम तैयार हैं. अल्लाह का क़ुरान के लिए हमें जितनी ज़्यादा ज़रबें चोटें आए हम इंशाअल्लाह उसे सहेंगे." मैंने पूछा कि कश्मीर की लड़ाई के बारे में क्या ख़याल है? इस सवाल पर वो थोड़ा अचकचाया, जैसे कि सवाल को समझ न पाया हो. ट्रेनिंग मैंने सवाल दोहराया तो उसने कहा, "बांडीपुरा में लड़ाई चल रही है. बहुत सारे इलाक़ों में है. मैं आपसे बहुत बात नहीं कर सकता. हमारे इन्चार्ज कहते हैं आप यहाँ कर्फ़्यू लगा दें."
हाफ़िज़ का कहना था कि अभी उसकी ट्रेनिंग पूरी नहीं हुई है और जब तक ट्रेनिंग पूरी नहीं होती तब तक उसे सीमापार 'लॉन्च' नहीं किया जा सकता. उसने कहा, "मैंने मानसेरा के ख़ालिद बिन वलीद कैंप में ट्रेनिंग ली है. जब ट्रेनिंग पूरी होगी तब हम लॉन्च होंगे क्योंकि एक ट्रेनिंग भी रह गई तो हम नहीं जा सकते. कमांडो ट्रेनिंग पूरी नहीं हुई तो हम नहीं जा सकते." लेकिन पाकिस्तान में रहने वाले हिज़्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन इस आरोप से इनकार करते हैं कि भारतीय कश्मीर में उनका संगठन अब भी घुसपैठ करता है. हाल ही में बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- सरहद पर 347 किलोमीटर की तारबाड़ लगी हुई है. सैंसर लगे हुए हैं. बीएसएफ़ के तीन लाख जवान तैनात हैं. इसके बावजूद भी भारत अगर घुसपैठ का इल्ज़ाम लगाता है तो ये बेबुनियाद है. |
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