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मंगलवार, 01 अप्रैल, 2008 को 18:26 GMT तक के समाचार
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शवों की पहचान से सरकार का इनकार
क़ब्र
दफ़ना गए लगभग हज़ार लोगों की शिनाख़्त नहीं हो पाई
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की सरकार ने लगभग एक हज़ार शवों की शिनाख़्त कराने की माँग को ख़ारिज कर दिया है जिन्हें पुलिस दफ़ना चुकी है.

लापता हुए लोगों के परिजनों के संगठन (एपीडीपी) ने दावा किया है कि उनके पास लगभग एक हज़ार क़ब्रों की सूची है जिनमें दफ़न किए गए लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

एपीडीपी का कहना है कि ये वे नागरिक हो सकते हैं जिन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार किया लेकिन उसके बाद उनका कोई अता-पता नहीं है.

एपीडीपी ने उरी के आस-पास एक दर्जन गाँवों में कई ऐसे क़ब्रों की खोज की है.

ऐसी ही एक जगह श्रीनगर से 62 किलोमीटर दूर किचमा गाँव है जहाँ लगभग दो सौ क़ब्र देखे जा सकते हैं लेकिन लेकिन दफ़न किए गए लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

चरमपंथी या नागरिक

गाँव वालों का कहना है कि उन्हें भी कोई जानकारी नहीं है. उन्हें पुलिस ने बताया कि ये भारतीय सेना के साथ मारे गए विदेशी चरमपंथी थे.

गाँव वालों के मुताबिक जो शव दफ़नाने के लिए यहाँ लाए गए वो या तो बुरी तरह जले हुए थे या उनका चेहरा कुचला हुआ था.

गाँव वालों का कहना है कि यहाँ दफ़नाने के कुछ हफ़्तों के भीतर ही पुलिस ने दो शवों को वापस निकाला था जो स्थानीय नागरिक थे और कथित तौर पर श्रीनगर में मुठभेड़ में मारे गए थे.

इस मामले का अभियुक्त पुलिस अधिकारी अभी भी फ़रार है. पिछले साल पुलिस ने अन्य इलाक़ों से क़ब्रों को खोद कर पाँच नागरिकों के शव निकाले थे.

एपीडीपी के सलाहकार परवेज़ इमरोज़ कहते हैं कि सेना हिरासत में हुई मौतों को दबाने के लिए विदेशी चरमपंथी की बात करती है.

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