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रविवार, 16 नवंबर, 2008 को 15:53 GMT तक के समाचार
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जम्मू-कश्मीर: अलगाववादियों ने चुनाव का बहिष्कार किया
हुर्रियत नेता
कई नेताओं को नागरिक सुरक्षा क़ानून और कुछ अन्य को घर पर ही नज़रबंद किया गया है
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठन ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस और कुछ अन्य नेता वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों का बहिष्कार कर रहे हैं.

हालाँकि, हुर्रियत ने वर्ष 2002 के चुनावों का भी बहिष्कार किया था लेकिन इस बार संगठन ने जगह-जगह पर रैलियाँ आयोजित कर अपने इस कदम के बारे में लोगों को बताने और उन्हें अपनी बात पर राज़ी करने का प्रयास किया है. उनका मानना है कि बिना कश्मीर समस्या के हल के क्षेत्र में शांति बहाल नहीं हो सकती और चुनाव केवल ध्यान बाँटने का षड्यंत्र हैं.

 'यदि वे चाहें तो चुनावों का बहिष्कार कर सकते हैं लेकिन उन्हें ज़ोर-ज़बर्दस्ती से किसी को रोकने का हक़ नहीं है
नेशनल कॉन्फ़ेंस

बीबीसी के श्रीनगर संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार जुलाई-अगस्त में 'आज़ादी' के समर्थन में हुए प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसक कार्रवाई के बाद आई अलगाववादी गुटों की चुनाव बहिष्कार की घोषणा का कश्मीर घाटी में ख़ासा असर देखने को मिला है.

कड़ी कार्रवाई, कई गिरफ़्तार

जैसी संभावना थी, प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग सभी प्रमुख अलगाववादी नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया है और इन रैलियों को होने से रोका है. यासीन मलिक, शब्बीर शाह को नागरिक सुरक्षा क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया है.

चुनाव- 2002, कुल: 87 सीटें
नेशनल कॉन्फ़्रेंस 28
कांग्रेस 20
पीडीपी 16
पैंथर्स पार्टी 4
भाजपा 1
बसपा 1
अन्य 17

इस क़ानून के तहत बिना अदालत मुकदमा चलाए किसी को दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है. मीरवाइज उमर फ़ारूक, सईद अली शाह गीलानी और आसिया अंद्राबी भी हिरासत में हैं.

उदारवादी माने जाते ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष 35 वर्षीय मीरवाइज़ उमर फारुक़ ने चुनावों के बहिष्कार का आहवान करने के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों से भी कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में अपना काम न करें. उन्हें उनके घर पर नज़रबंद कर दिया गया है.

कट्टरपंथी माने जाते सईद अली शाह गीलानी भी चुनावों का विरोध कर रहे हैं और चुनावों को बेमानी मानते हैं. वे त्रिपक्षीय वार्ता हो और भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह के हक़ में हैं.

जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ़्रीडम पार्टी के नेता शब्बीर शाह को नागरिक सुरक्षा क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया है. वे चाहते हैं कि राज्य के निवासी ख़ुद अपना भविष्य तय करें और भारत, पाकिस्तान और कश्मीरियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हो.

 हमनें सभी ज़िला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि हमे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा. हमने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने पर बल दिया है. चुनाव प्रक्रिया में किसी पुलिसकर्मी या सैन्य अधिकारी को दख़ल देने की इजाज़त नहीं होगी
मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालास्वामी

पिछले साल अगस्त में जब अलगाववादियों ने 'आज़ादी' माँगते हुए चार रैलियाँ की थीं तब भी प्रशासन ने कर्फ़्यू लगाकर इन रैलियों को ख़त्म कराया था.

बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा ने सरकारी कर्मचारियों से कहा है कि वे चुनाव प्रक्रिया में भाग ने लें और चुनाव संबंधी कोई ड्यूटी न करें. उनके शब्दों में - 'ये जनता के स्वतंत्रता के संघर्ष के साथ विश्वासघात है.'

जम्मू-कश्मीर
विधानसभा क्षेत्र- 87
मतदान की तारीखें
17 नवंबर---- 10 सीटें
23 नवंबर-----6 सीटें
30 नवंबर-----5 सीटें
07दिसंबर------18 सीटें
13दिसंबर-------11 सीटें
16दिसंबर----16 सीटें
24 दिसंबर---21 सीटें
मतगणना---- 28 दिसंबर

अलगाववादियों और चरमपंथियों के बारे में नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने कहा है कि 'यदि वे चाहें तो चुनावों का बहिष्कार कर सकते हैं लेकिन उन्हें ज़ोर-ज़बर्दस्ती से किसी को रोकने का हक़ नहीं है.'

उधर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालास्वामी ने कहा है कि सुरक्षा बलों को चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह का दख़ल देने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

उनका कहना था, "हमनें सभी ज़िला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि हमे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा. हमने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने पर बल दिया है. चुनाव प्रक्रिया में किसी पुलिसकर्मी या सैन्य अधिकारी को दख़ल देने की इजाज़त नहीं होगी."

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