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रविवार, 19 अक्तूबर, 2008 को 06:07 GMT तक के समाचार
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जम्मू-कश्मीर में सात चरणों में चुनाव
एन गोपालस्वामी
राज्य में चुनाव प्रक्रिया सात चरणों में 31 दिसंबर तक पूरी हो जाएगी
भारत के चुनाव आयोग ने भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में चुनावों के लिए तारीखों की घोषणा कर दी है. राज्य में मतदान सात चरणों में पूरा किया जाएगा.

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार इन चुनावों के लिए पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बल मुहैया कराने के लिए राज़ी है.

उनका कहना था, "राज्य में 17 नवंबर से लेकर 24 दिसंबर तक सात चरणों में मतदान का काम पूरा होगा और 28 दिसंबर को मतगणना होगी. हम 31 दिसंबर तक चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर लेंगे."

राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार के मुख्य सचिव से बातचीत हुई है और सुरक्षा बलों की कोई परेशानी नहीं होगी.

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव की तारीखों को लेकर चुनाव आयोग में सहमति नहीं बन पाई थी जिसके कारण जब पाँच राज्यों के लिए विधानसभा चुनावों की तारीख़ तय की गई थी तो जम्मू-कश्मीर की तारीख़ें नहीं घोषित हुई थीं.

 यदि कोई बहिष्कार का आह्वान करता है, तो हम ये भरोसा दिलाने के सिवा और कुछ नहीं कर सकते कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीक़े से होंगे
एन गोपालस्वामी, मुख्य चुनाव आयुक्त

अब चुनाव आयोग का कहना है कि इस संबंध में बैठकों के बाद सहमति बन गई है.

साथ ही चुनावों के बहिष्कार के बारे में पूछे जाने पर चुनाव आयुक्त ने कहा,"यदि कोई बहिष्कार का आह्वान करता है, तो हम ये भरोसा दिलाने के सिवा और कुछ नहीं कर सकते कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीक़े से होंगे."

सात चरण

मतदान की तारीखें
मतदान की तारीखें
17 नवंबर---- 10 सीटें
23 नवंबर-----6 सीटें
30 नवंबर-----5 सीटें
07दिसंबर------18 सीटें
13दिसंबर-------11 सीटें
16दिसंबर--------16 सीटें
24 दिसंबर--------21 सीटें

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की 87 सीटें हैं.

पहले चरण में लेह और करगिल के इलाक़ों में मतदान होगा जबकि राजधानी श्रीनगर में अंतिम चरण में मतदान होगा.

जम्मू-कश्मीर में अंतिम विधानसभा चुनाव 2002 में हुआ था और तब चुनाव चार चरणों में करवाए गए थे.

पिछले विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने मिलकर सरकार बनाई थी.

व्यवस्था के तहत पहले तीन साल पीडीपी के प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री रहे जिसके बाद कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आज़ाद ने मुख्यमंत्री का पद संभाला.

हालाँकि आज़ाद अपना कार्यकाल पूरा नही कर पाए क्योंकि पीडीपी ने तीन साल पूरा होने से पहले ही समर्थन वापस ले लिया था जिसके बाद इस वर्ष जुलाई में विधानसभा भंग कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.

पीडीपी ने आज़ाद सरकार से समर्थन अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दिए जाने के सरकार के फ़ैसले के विरोध में वापस लिया था.

इस मामले को लेकर राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे.

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