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दोनों कश्मीर के बीच व्यापार शुरु | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ऐतिहासिक क़दम के तहत नियंत्रण रेखा के आर-पार के कश्मीरों के बीच व्यापार की शुरुआत हो गई है. भारत प्रशासित कश्मीर से मंगलवार को ट्रकों का काफ़िला पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की ओर रवाना किया गया. भारत प्रशासित कश्मीर की ओर से सामान से लदे 13 ट्रक पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की ओर रवाना किए गए जबकि जम्मू से तीन ट्रकों को नियंत्रण रेखा के पार रवाना किया गया. मंगलवार को ही नियंत्रण रेखा के उस पार से ट्रकों का एक काफ़िला इस ओर आने वाला है. हालांकि नियंत्रण रेखा को तीन साल पहले ही यात्रियों के लिए खोल दिया गया था लेकिन इसमें सिर्फ़ यात्री ही नियंत्रण रेखा पार करते रहे हैं, बसें नहीं. व्यापार के लिए नियंत्रण रेखा को खोलने के बाद पहली बार दोनों ओर से ट्रक भी आना जाना कर रहे हैं. समारोह इन ट्रकों को गवर्नर एनएन वोहरा ने सलामाबाद से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. सलामाबाद उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा से 12 किलोमीटर पहले पड़ता है. यहाँ श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद के यात्रियों के लिए एक टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर बनाया गया है. यह ट्रक कमान पोस्ट पर बने अमान सेतु से उरी-मुजफ़्फ़राबाद के रास्ते नियंत्रण रेखा के पार गए. इस अवसर पर सलामाबाद में समारोह का माहौल था. मौक़े पर दो सौ से अधिक लोग मौजूद थे. स्थानीय लोगों ने और ढोल-नगाड़े बजाए और स्कूली बच्चों ने गीत गाकर खुशी ज़ाहिर की. इन 13 ट्रकों के अलावा तीन और ट्रक कड़ी सुरक्षा में पुंछ-रावलकोट के रास्ते से नियंत्रण रेखा के पार रवाना हुए. सीमा से उस पार जाने वाले ट्रकों में से एक ट्रक के चालक ज़हूर अहमद इस मौक़े पर बहुत खुश नज़र आ रहे थे. उन्होंने कहा, "मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उस पार जा सकूँगा. मुझे जब दो दिन पहले बताया गया कि उस पार जाना है तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था." उन्होंने कहा, "मैं पिछले 20 साल से ट्रक चला रहा हूँ लेकिन मेरी ज़िंदगी का यह बहुत खुशी का मौक़ा है. जब सोमवार को मैं अपने घर से चला तो मेरी माँ ने मुझे काजल लगाया और आस पड़ोस के लोग एक जुलूस के रूप में मेरे पीछे आए. मुझे लगा कि जैसे मैं कोई मंत्री हूँ." रावलकोट-पुंछ रास्ता भी खुला जम्मू में बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी ने ख़बर दी है कि राज्यपाल के सलाहकार एचएच तैयबजी ने तीन ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रावलकोट-पुंछ के रास्ते पर रवाना किया. स्वतंत्रता के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई भी भारतीय वाहन नियंत्रण रेखा के उस पार इतनी दूरी तक गया हो. हालांकि नियंत्रण रेखा के आरपार लोगों का पैदल आनाजाना 2005 में ही शुरू हो गया था. पुंछ-रावलकोट के रास्ते को व्यापार के लिए खोला जाना अभी सिर्फ़ सांकेतिक रूप से ही शुरू हुआ है जबकि असलियत में यहां से बाद में व्यापार शुरू किया जाएगा. निर्णय के अनुसार यह ट्रक नियंत्रण रेखा के दोनों ओर से श्रीनगर-मुज़फ़्फराबाद और रावलकोट-पुंछ के रास्तों पर सप्ताह में दो बार चला करेंगे. शांति प्रक्रिया पिछले ही दिनों भारत और पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा के आरपार व्यापार शुरू करने का निर्णय किया था.
व्यापार शुरु करने की तैयारी के लिए पाक प्रशासित कश्मीर से व्यापारियों का एक प्रतिनिधि मंडल भारत प्रशासित कश्मीर पहुँचा था जिनका भारत प्रशासित कश्मीर में गर्मजोशी से स्वागत किया गया था. भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही शांति प्रक्रिया के तहत विश्वास बहाली के लिए उठाए जा रहे क़दमों में यह एक और क़दम है. कश्मीर से कमान पोस्ट तक की 120 किलोमीटर लंबी सड़क को सलामाबाद में अनेक सुविधाओं से युक्त कर दिया गया है जहाँ सामान की जाँच की जाएगी. कश्मीर चेंबर ऑफ़ कामर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) के प्रमुख मुबीन शाह ने कहा, "हम सामान से लदे 13 ट्रकों को यहाँ से नियंत्रण रेखा के पार भेज रहे हैं जबकि पाँच या छह ट्रक उस पार से यहाँ आने की उम्मीद है." राज्य स्तर का व्यापार नियंत्रण रेखा के आर-पार व्यापार दोनों ओर के लोगों के बीच संबंध बनाने के पहले प्रयास के तहत शुरू हुई है. मुबीन शाह कहते हैं, "पाकिस्तान अधिग्रहीत कश्मीर में भेजे जाने वाले सामान में फल, राजमा, शहद, मसाले और बादाम हैं जबकि उधर से आने वाले सामान में चावल, मसाले, छुहारे और किशमिश होंगे." उन्होंने कहा, "यह व्यापार अंतरराष्ट्रीय स्तर का न होकर सिर्फ़ कश्मीर से कश्मीर तक होगा जिसमें लेनदेन मुद्रा का नहीं बल्कि सामान का ही होगा." दो ट्रकों में अपना माल भेजने वाले क्षेत्र के एक व्यापारी फ़ारुख़ अहमद कहते हैं, "यह मौक़ा बहुत दिनों के बाद आया है. मैंने भी अपना माल भेजा है. हमें माल के बदले पैसा नहीं बल्कि माल के बदले दूसरा माल मिलेगा जिसे हम यहाँ बेचेंगे." व्यापारियों का कहना है कि यह वैकल्पिक व्यवस्था है और जल्दी ही दोनों ओर की सरकारें दोहरी मुद्रा में व्यापार का रास्ता निकाल लेंगे जैसा कि नेपाल के साथ होता है. |
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