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एयर इंडिया कर्मियों को छुट्टी का प्रस्ताव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में एक निजी विमानन कंपनी में हुई छँटनी के बाद अब सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया भी अपने 15 हज़ार कर्मचारियों को बिना वेतन के तीन से पाँच साल के लिए छुट्टी देने की एक योजना का प्रस्ताव रखने जा रहा है. एयर इंडिया के मुख्य प्रबंध निदेशक रघु मेनन ने कहा, " हम अपने कर्मचारियों को बिना वेतन के तीन से पाँच साल की छुट्टी पर जाने की पेशकश देने की योजना बना रहे हैं." एयर इंडिया के प्रवक्ता जितेंद्र भार्गव ने स्पष्ट किया है कि यह कर्मचारियों की छँटनी की योजना नहीं है और यह कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक योजना होगी और इसके लिए कर्मचारियों को बाध्य नहीं किया जाएगा. हैदराबाद में बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारुख़ के अनुसार भारत के उड्डयन एवं नागरिक विमानन मंत्री प्रफ़ुल्ल पटेल ने भी कहा है कि एयर इंडिया सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है और इसमें किसी तरह की छँटनी का सवाल ही नहीं है. बुधवार को भारत की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी विमानन कंपनी जेट एयरवेज़ ने अपने 19 सौ कर्मचारियों की नौकरी ख़त्म कर दी थी. विमानन कंपनी का कहना है कि वैश्विक आर्थिक संकट का असर विमानन कंपनियों पर भी पड़ रहा है और कंपनी को बचाने के लिए खर्च में कटौती करने की ज़रुरत है. इससे पहले मंगलवार को जेट एयरवेज़ और किंगफ़िशर एयरलाइन्स के बीच एक समझौता हुआ था और दोनों ने मिलकर काम करने का फ़ैसला किया था. संकट में उद्योग जेट एयरवेज़ की घोषणा के बाद ख़बर आई है कि एयर इंडिया अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने की एक स्वैच्छिक योजना पर विचार कर रहा है. हैदराबाद में समाचार एजेंसी पीटीआई से हुई बातचीत में रघु मेनन ने कहा, "हम इस योजना के लिए कर्मचारियों को छुट्टी पर जाने के लिए प्रस्ताव देने का विचार कर रहे हैं."
मेनन ने कहा कि जो कर्मचारी इस पेशकश को स्वीकार कर छुट्टी पर जाएँगे अगर वे बाद में वापस आना चाहेंगे तो हम उन्हें कुछ वरिष्ठता देकर और पुराने वेतन पर फिर नौकरी पर रखे लेंगे. उन्होंने कहा है कि जिन कर्मचारियों को छुट्टी का प्रस्ताव दिया जाएगा वे 'नॉन-ऑपरेशनल स्टाफ़' हैं और इनकी संख्या 15 हज़ार है. एयर इंडिया के अधिकारी का कहना है कि यह योजना वर्ष 2002 में भी लाई गई थी और अब इस पर फिर से विचार हो रहा है. एयर इंडिया के प्रवक्ता जितेंद्र भार्गव ने मेनन के इस बयान को स्पष्ट करते हुए कहा है कि एयर इंडिया कर्मचारियों को तीन से पाँच साल तक की अवैतनिक छुट्टी की योजना पर विचार ज़रुर कर रहा है लेकिन यह छँटनी नहीं है. उनका कहना था, "यह पूरी तरह से स्वैच्छिक योजना होगी और किसी भी कर्मचारी को इसे स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा." जेट एयरवेज़ ने बुधवार को जिन लोगों को नौकरी से निकाला था उनमें से ज़्यादातर कैबिन कर्मचारी हैं. वे प्रशिक्षु के रूप में काम कर रहे थे. कंपनी प्रबंधन से इस बात से इनकार किया था कि वह अपने स्थायी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है. प्रबंधन ने कहा था कि हालात बेहतर होने पर निकाले गए इन कर्मचारियों को फिर नौकरी पर रख लिया जाएगा.
जेट एयरवेज़ ने नौकरियाँ ख़त्म करने की घोषणा अपने प्रतिद्वंदी विमानन कंपनी किंगफ़िशर के साथ हुए एक समझौते के बाद की. समझौते के तहत अब दोनों कपनियाँ उड़ानों की संख्या कम करेंगी. हालांकि किंगफ़िशर एयरलाइंस ने कहा है कि वह अपने कैबिन कर्मियों की छँटनी नहीं करेगा. अपने एक और साझेदार डेक्कन एयर के कैप्टन जीआर गोपीनाथ से बुधवार को हुई चर्चा के बाद किंगफ़िशर के संचालक विजय माल्या ने कहा, "हमारे पास कोई अतिरिक्त कर्मचारी नहीं हैं इसलिए किसी कैबिन कर्मी को निकाले जाने का सवाल ही नहीं है." प्रदर्शन कंपनी की इस घोषणा के बाद निकाले गए कर्मचारियों ने मुंबई में जेट एयरवेज़ के दफ़्तर पर प्रदर्शन की अपनी नौकरी बहाल करने की माँग की थी. उधर, समाचार एजेंसी यूएनआई के मुताबिक जेट एयरवेज़ से निकाले गए क़रीब सौ कर्मचारियों ने गुरुवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी घरेलू आवाई अड्डा पर तीन घंटे तक प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि उनकी बात सुनने के लिए जेट एयरवेज़ का कोई अधिकारी नहीं आया. इस बीच इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने चेतावनी दी है कि यदि जेट एयरवेज़ अपने कर्मचारियों को फिर से बहाल नहीं करता है तो उनकी पार्टी मुंबई में जेट एयरवेज़ के किसी विमान को उतरने या उड़ान भरने नहीं देगी. |
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