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सिंगुर नहीं, कोलकाता में नैनो! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टाटा की लखटकिया कार और पूरा संयंत्र, वो भी सिंगुर नहीं, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में! भला ऐसा कैसे हो सकता है? टाटा मोटर्स ने तो हाल ही में नैनो परियोजना को राज्य से बाहर ले जाने का ऐलान कर दिया है और नैनो तो अभी बनी भी नहीं है. इसके बावजूद यह सच है कि कोलकाता के लोगों को टाटा की छोटी कार भी देखने को मिल रही है और पूरा संयंत्र भी. दरअसल कोलकाता की एक दुर्गापूजा समिति ने यह कारनामा किया है. उसने अपना पंडाल बनाया है नैनो संयंत्र की तर्ज़ पर. वहाँ नैनो कार का मॉडल भी रखा हुआ है. देखने में एकदम असली जैसा, अंतर यही है कि उसमें इंजन नहीं है. दिलचस्प बात यह है कि इस मॉडल को बनाने पर भी एक लाख रुपए का ही ख़र्च आया है. इस पूजा को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है. आयोजन कोलकाता में संतोष मित्र स्क्वेयर पूजा समिति की गिनती जानीं-मानीं समितियों में की जाती है. हर साल वह कोई अनूठी थीम के आधार पर पूजा का आयोजन करती है. इसलिए इस साल उसने नैनो परियोजना को चुना है. नैनो के जाने के बाद पंडाल (जो नैनो संयंत्र की कॉपी है) में महज़ एक बदलाव करना पड़ा है. उस पर एक मोटी ज़ंजीर बना कर उसमें ताला लटका दिया गया है. समिति के अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप घोष कहते हैं, "हम औद्योगिकीकरण का समर्थन करते हैं. लेकिन राज्य में बीते कुछ दशकों के दौरान 50 हज़ार से ज़्यादा औद्योगिक ईकाइयाँ बंद हो चुकी हैं. पहले उनको खोला जाना चाहिए. उसके बाद ही लखटकिया कार परियोजना लगनी चाहिए." पंडाल के बाहर ही नैनो कार का एक मॉडल बनाया गया है. घोष बताते हैं कि इस थीम के जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि राज्य में बंद हज़ारों कारखानों को दोबारा खोला जाए ताकि बेरोज़गारों को नौकरियाँ मिले. उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूँ कि लोग चाहते हैं कि एक लाख की लागत वाली नैनौ कार भी सिंगुर से ही बन कर बाहर निकले. टाटा मोटर्स को अपने फ़ैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए.' इस पंडाल और नैनो का मॉडल बनाने वाले कारीगर सपन कुमार पाल बताते हैं कि पंडाल बनाने में सौ से ज़्यादा कारीगरों ने दो महीने तक दिन-रात काम किया है. ख़र्च इस सामने बने नैनो के मॉडल को इस तरीक़े से बनाया गया है कि इसे छू कर भी कोई नहीं कह सकता कि यह नकली नैनो है. फ़ाइबर और ग्लास से इसे बनाया गया है.
नैनो की तरह ही इसे बनाने में भी एक लाख रुपए का ख़र्च आया है. बस इसमें इंजन नहीं है. सपन का कहना है कि टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना को लेकर राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मची है. इसकी वजह से इस पंडाल और नैनो को देखने के लिए भारी भीड़ जुट रही है. परिवार के साथ यह पूजा देखने पहुँचे सुकुमार साहा कहते हैं, "हमने अब तक सिंगुर नहीं देखा था. इस पूजा के ज़रिए हमें सिंगुर संयंत्र भी देखने को मिला और नैनो भी." महानगर के कई अन्य पूजा आयोजकों ने भी इस वर्ष अपनी पूजा का थीम सिंगुर रखा है. कई पंडालों की आकृति पूरी तरह से सिंगुर गाँव के रूप में बनाई गई है. महानगर में लगभग 21 ऐसे पूजा पंडाल हैं जिनकी थीम सिंगुर और नंदीग्राम की घटनाओं पर आधारित है. लेकिन नैनो वाले इस पंडाल में ही सबसे ज़्यादा भीड़ उमड़ रही है. |
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