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सिंगुरः बुद्धदेव और रतन टाटा की मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल के सिंगुर में टाटा की महात्वाकांक्षी नैनो कार परियोजना को बनाए रखने की दिशा में राज्य सरकार अंतिम प्रयास करने में लगी हुई है. इसी के मद्देनज़र शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा के बीच शुक्रवार को कोलकाता में मुलाक़ात हो रही है. जानकारों का मानना है कि जहाँ इस बातचीत के दौरान दोनों पक्ष परियोजना के रास्ते में आ रही अड़चनों पर बातचीत करेंगे वहीं मुख्यमंत्री परियोजना को जारी रखने के लिए समूह की मदद और ज़रूरी सुरक्षा मुहैया कराने का वादा दोहरा सकते हैं. दोनों के बीच शुक्रवार को हो रही यह बातचीत सिंगुर परियोजना को लेकर एक निर्णायक बातचीत होगी. दरअसल मुख्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस के आंदोलन के चलते टाटा ने नैनो कार परियोजना को वहाँ से हटाने का मन बना लिया है लेकिन राज्य सरकार चाहती है कि टाटा यह परियोजना राज्य से न हटाए. इस बीच टाटा ने सिंगुर संयंत्र से सामान हटाना शुरु कर दिया है और यह चर्चा शुरु हो गई है कि नैनो के लिए नया संयंत्र कहाँ स्थापित किया जाएगा. टाटा समूह लगातार यह दोहरा रहा है कि पुलिस की निगरानी में काम नहीं किया जा सकता है. इसके लिए संयंत्र के आसपास की स्थितियों का सामान्य होना ज़रूरी है. टाटा को कई राज्य सरकारों ने संयंत्र स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया है. विवाद सिंगुर में टाटा की नैनो परियोजना के लिए सरकार ने किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण किया था. लेकिन ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस इसका विरोध कर रही है.
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने किसानों की इच्छा के विपरीत ज़मीन पर क़ब्ज़ा किया है. तृणमूस कांग्रेस का माँग है कि राज्य सरकार किसानों से अधिगृहित 400 एकड़ ज़मीन किसानों को लौटा दे क्योंकि उन्होंने राज्य सरकार से मुआवज़ा भी नहीं लिया है. ममता बैनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के इस आंदोलन के कारण सिंगुर संयंत्र में कामकाज रोक दिया गया. इस बाधा से टाटा ग्रुप चिंतित है. पिछले दिनों राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी की मध्यस्थता से सरकार और तृणमूल कांग्रेस की बातचीत भी हुई थी और एक समझौते की घोषणा भी हुई थी. लेकिन समझौते से ज़मीन वापसी को लेकर पैदा हुए विवाद का हल नहीं निकल पाया. तृणमूल कांग्रेस की मांग है कि टाटा अपनी कल-पुर्ज़े बनाने वाला संयंत्र कहीं और ले जाए लेकिन सरकार और टाटा मोटर्स का कहना है कि कल-पुर्ज़े बनाने वाला संयंत्र कहीं और नहीं ले जाया जा सकता क्योंकि इससे लखटकिया कार नैनो की लागत बढ़ जाएगी. टाटा का कहना है कि वह दीपावली तक नैनो कार बाज़ार में उतारने को लेकर प्रतिबद्ध है. | इससे जुड़ी ख़बरें नैनो परियोजना को बचाने के लिए वार्ता26 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सिगुंर में टाटा प्लांट के गार्डों पर हमला23 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नैनो के लिए ज़मीन देने को तैयार कर्नाटक18 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सिंगुर में अब 'नैनो' के समर्थन में धरना13 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस ममता फिर चलीं आंदोलन की राह13 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नाखुश टाटा को समझाने की कोशिश08 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सिंगुर:काम रुकने से दुखी बाप ने जान दी 03 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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