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नाखुश टाटा को समझाने की कोशिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल सरकार ने टाटा को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि सिंगुर मुद्दे पर हुए समझौते से कंपनी की कार फैक्ट्री पर कोई असर नहीं पड़ेगा. टाटा मोटर्स की नैनो कार फैक्ट्री के लिए सिंगुर में किसानों से ली गई ज़मीन के मुद्दे पर आंदोलन कर रही तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार के बीच रविवार को ही समझौता हुआ है. लेकिन टाटा मोटर्स ने सोमवार को घोषणा कर दी कि सिंगुर ज़मीन विवाद पर हुई सहमति में स्पष्टता न होने के कारण नैनो का निर्माण कार्य स्थगित रखा जाएगा. इसके बाद कोलकाता में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की उपस्थिति में पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री निरुपम सेन ने संवाददाताओं से कहा कि टाटा परियोजना में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा और न ही वेंडर पार्क को स्थानांतरित किया जाएगा. तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने दावा किया था कि समझौते के तहत खेती योग्य ज़मीन वापस की जाएगी. निरुपम सेन ने इस पर कहा कि नैनो कार संयंत्र और वेंडर्स पार्क एक एकीकृत परियोजना है और यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है. सेन ने कहा कि राज्य सरकार ने बैठक में टाटा परियोजना में बदलाव या वेंडरों के पार्क के स्थानांतरण पर कोई सहमति नहीं दी थी क्योंकि यह एकीकृत परियोजना है. उन्होंने कहा कि राजभवन में रविवार रात हुई बैठक में मुख्य संयंत्र और वेंडर पार्क को यथास्थिति पर रखने पर विचार विमर्श हुआ. उद्योग मंत्री ने कहा कि अधिकतम जमीन को लौटाने और चिन्हित करने के लिए समिति गठित की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर एक बार फिर विचार होगा और यही बैठक की भावना थी. टाटा की प्रतिक्रिया उधर टाटा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जब वे आश्वस्त हो जाएँगे कि उनके संयंत्र और कल पुर्जे की इकाइयों की स्थिति यथावत है और समझौते करनेवाले लोग सिंगुर में शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाए रखने के प्रति आश्वस्त हैं तो अपने फ़ैसले की समीक्षा करेंगे. इसके पहले रविवार रात को टाटा की नैनो के निर्माण के लिए सिंगुर स्थित टाटा की फ़ैक्टरी के लिए ज़मीन के विवाद पर विपक्षी तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच सहमति हो गई थी. समझौते के बाद तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने पिछले 15 दिनों से सिंगुर में चल रहा आंदोलन वापस लेने की घोषणा की थी. समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में ममता बनर्जी ने इसे बड़ी और निर्णायक जीत बताया और कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि आख़िरकार किसानों को न्याय मिला. ग़ौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी की मध्यस्थता में बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है. रविवार को राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी की मौजूदगी में ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य और अन्य प्रतिनिधियों के बीच क़रीब छह घंटे तक बातचीत चली. बातचीत के बाद संवाददाता सम्मेलन में समझौते की घोषणा की गई. प्रेस कॉन्फ़ेंस में संयुक्त घोषणापत्र जारी किया गया है. घोषणापत्र के मुताबिक़ जिन किसानों ने ज़मीन अधिग्रहण के लिए सहमति नहीं दी है, उन्हें परियोजना क्षेत्र और आसपास के इलाक़ों से ज़मीन देने की घोषणा की गई है. |
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