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नैनो: ज़मीन देने को तैयार कर्नाटक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टाटा की नैनो कार परियोजना को लेकर अनिश्चितता दौर जारी है, इस बीच कर्नाटक सरकार ने टाटा मोटर्स को एक हज़ार एकड़ ज़मीन देने की इच्छा ज़ाहिर की है. टाटा मोटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर जी रविकांत ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुरियप्पा से मुलाक़ात की है जिसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बात की. रविकांत ने कहा, "मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हम टाटा मोटर्स का नैनो प्लांट स्थानांतरित करना चाहते हैं तो पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिलेगा." रविकांत ने कहा, "परियोजना के लिए एक हज़ार एकड़ ज़मीन की ज़रूरत है, यह एक इंटीग्रेटेड परियोजना है." इंटीग्रेटेड परियोजना का मतलब है कि पूरा प्लांट एक ही जगह होगा, टाटा मोटर्स एक ही प्लांट में सारे काम करके कार की लागत को कम से कम रखना चाहती है. जब उनसे पूछा गया कि क्या कर्नाटक सरकार ज़मीन देने को तैयार है, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "हाँ, अगर हम नैनो का प्लांट वहाँ ले जाते हैं तो हमें ज़मीन की ज़रूरत होगी." टाटा मोटर्स ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि उसने पश्चिम बंगाल में सिंगुर से अपने प्लांट को हटाने का फ़ैसला किया है या नहीं. रविकांत ने इतना ही कहा, "हम अपने विकल्पों पर विचार कर रहे हैं और ज़रूरत पड़ने पर ऐसा कर सकते हैं. " टाटा मोटर्स का एक प्लांट कर्नाटक के धारवाड़ ज़िले में हैं जहाँ ट्रैक्टर और बस बनाए जाते हैं. पश्चिम बंगाल इस बीच सिंगुर के मामले पर सरकार और विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के बीच हुई बातचीत काफ़ी कड़वाहट के साथ समाप्त हुई है जिससे लग रहा है कि वहाँ नैनो का भविष्य ख़तरे में है. कोलकाता से बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक ने बताया है कि ममता बनर्जी ने अपना विरोध प्रदर्शन दोबारा शुरू करने की घोषणा कर दी है, उन्होंने माँग की है कि किसानों को उनकी ज़मीन वापस दिलाई जाए. ममता ने कहा, "हम अपना प्रदर्शन शुरू कर रहे हैं, हम उन किसानों की ज़मीन वापस हासिल करना चाहते हैं जिन्हें नैनो प्रोजेक्ट की वजह से बेदख़ल किया गया है." ममता बनर्जी की माँग है कि सरकार प्रोजेक्ट एरिया में से 300 एकड़ ज़मीन किसानों को लौटाए जबकि वे 100 एकड़ ज़मीन किसानों को प्रोजेक्ट एरिया के नज़दीक दिए जाने पर सहमत हुई हैं. बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा था कि वे सिर्फ़ 70 एकड़ ज़मीन प्रोजेक्ट एरिया के भीतर से वापस दे सकते हैं, "उससे एक इंच ज़्यादा नहीं". भट्टाचार्य ने कहा, "ममता परियोजना को समझ नहीं रही हैं, मुख्य कार प्लांट के लिए 645 एकड़ ज़मीन चाहिए, अन्य प्लांटों के लिए 290 एकड़. ऐसे में एक हज़ार एकड़ में से हम किसानों को सिर्फ़ 70 एकड़ ज़मीन दे सकते हैं. बाक़ी ज़मीन हम परियोजना के बाहर देने को तैयार नहीं हैं लेकिन ममता बनर्जी को यह मंज़ूर नहीं है." इसके जवाब में ममता कहती हैं, "मुख्यमंत्री ताक़त का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उन्हें इसके परिणामों के लिए भी तैयार रहना चाहिए." भट्टाचार्य कहते हैं कि "टाटा मोटर्स काम शुरू करने को तैयार है लेकिन वे उचित माहौल चाहते हैं जो उन्हें नहीं मिल पा रहा है". | इससे जुड़ी ख़बरें नैनो प्रोजेक्ट पर अभी भी संशय09 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नाखुश टाटा को समझाने की कोशिश08 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नैनो का निर्माण स्थगित रहेगा: टाटा08 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नैनो का विरोध ख़त्म, समझौता हुआ07 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सिंगुर:काम रुकने से दुखी बाप ने जान दी 03 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस टाटा ने नैनो प्लांट का काम रोका02 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस सिंगुर से टाटा मोटर्स ने हटाए कर्मचारी29 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस सिंगूर में टाटा की कार फैक्ट्री का घेराव24 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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