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क्या नैनो चली पंतनगर? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिंगूर से हटने के बाद उत्तराखंड के पंतनगर से नैनो का अंतरिम उत्पादन करने की तैयारी चल रही है. पंतनगर में टाटा मोटर्स की छोटे ट्रक बनाने की फैक्टरी है और इस ट्रक के कल-पुर्जे नैनो से मिलते हैं सिंगूर से विदाई के बाद ऐसा लगता है कि पंतनगर ने नैनो के लिए अपने दरवाज़े खोल दिए हैं. पंतनगर के इंडिस्ट्रयल एस्टेट में टाटा अपने छोटे ट्रक टाटा-एस का निर्माण करता है और नैनो की मॉडल कारों को यहीं तैयार किया गया था. विशेषज्ञों का कहना है कि टाटा-एस और नैनो के कई कल-पुर्जे समान हैं लिहाजा नैनो के लिए बुनियादी ढांचा यहाँ पहले से ही मौजूद है. पिछले कुछ सप्ताह में टाटा मोटर्स की इस फैक्टरी में इंजीनियरों और कामगारों की संख्या बढ़ाकर दोगुनी कर दी गई है और सिंगूर से भारी मशीनरी को लगातार यहां शिफ्ट किया जा रहा है. ख़बरें यहाँ तक हैं कि 100 के करीब नैनो यहाँ बन के तैयार खड़ी हैं. मुलाक़ात दो दिन पहले ही टाटा समूह के वरिष्ठ प्रबंधकों ने प्रदेश के आला अधिकारियों और मुख्यमंत्री से मुलाक़ात की है. हालांकि इस मुलाक़ात का विवरण नहीं दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूरी ने संकेत देते हुए कहा,'' टाटा समूह के अधिकारियों से बातचीत चल रही है. अब जब सिंगूर से टाटा ने अपना उद्योग समेट लिया है, हमें खुशी होगी अगर नैनो का उत्पादन यहाँ से हो.'' इन ख़बरों का हवाला दिए जाने पर कि पंतनगर में नैनो बनाई जा रही है, उनका कहना था कि,'' टाटा का अपना प्लांट है और कार अगर बनेगी तो सभी देखेंगे.'' गौरतलब है कि शुक्रवार को सिंगूर से हटने की घोषणा के साथ ही रतन टाटा ने ये भी कहा था नैनो का अंतरिम उत्पादन दूसरे राज्यों में मौजूद टाटा की इकाइयों में किया जाएगा. इस बारे में जब पंतनगर में टाटा कंपनी के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि एक-दो दिन में तस्वीर साफ़ हो जाएगी. विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड में उत्पाद शुल्क और आयकर में छूट की सुविधा, बिजली की सस्ती दर, दिल्ली से नजदीकी और अपेक्षाकृत अनुकूल माहौल टाटा के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है. और कोई आश्चर्य नहीं कि दीपावली के मौके पर लखटकिया नैनो फिलहाल पंतनगर से ही तैयार होकर बाज़ार में जाए. |
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