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बुश-मनमोहन की महत्वपूर्ण मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परमाणु समझौते को अमरीकी संसद से पास कराने की कोशिशों के बीच भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज वॉशिंगटन में अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मुलाक़ात करने वाले हैं. भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौता अमरीकी संसद की मंज़ूरी के बाद ही लागू हो पाएगा. लेकिन बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि यह एक जटिल प्रक्रिया होगी. हालाँकि अमरीकी अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि दोनों नेताओं की मुलाक़ात से पहले अमरीकी संसद इस समझौते को मंज़ूरी दे देगा. मंगलवार को सीनेट की विदेश मामलों की समिति ने परमाणु समझौते को मंज़री दे दी थी. लेकिन अभी भी अमरीकी संसद से मंज़ूरी मिलने और फिर समझौते पर हस्ताक्षर होने के बीच कई क़दम लिए जाने बाक़ी हैं. आख़िरी समय में परमाणु समझौते को पास कराने की कोशिशें इसलिए भी मुश्किल हो रही हैं क्योंकि अमरीकी संसद आर्थिक संकट और उससे निपटने की योजना पर विचार कर रहा है. मुश्किलें इसके अलावा भी संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया जाना है. वैसे भी परमाणु समझौते को मंज़ूरी देने के लिए बुश प्रशासन को डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन हासिल करना ज़रूरी है जिनका दोनों सदनों में बहुमत है. दरअसल किसी भी विधेयक को सदन में पेश किए जाने के 30 दिन के बाद ही उसे मंज़ूर करता है. इसलिए परमाणु समझौते को तुरंत पास करने के लिए भी बुश प्रशासन को डेमोक्रेटिक पार्टी से मदद लेनी होगी. इसके अलावा प्रतिनिधि सभा और सीनेट अलग-अलग इस विधेयक को पास करके राष्ट्रपति के पास भेजेंगे तभी ये समझौता जनवरी में नई सरकार के समक्ष जा पाएगा. बुश प्रशासन ने 10 सितंबर को संसद में समझौता पेश किया था. लेकिन क़ानून के मुताबिक़ संसद के पास इतना समय नहीं कि वो मौजूदा आख़िरी सत्र में इसे पास कर सके और इसके लिए क़ानून में बदलाव लाना होगा. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि अगर इस समझौते पर राष्ट्रपति बुश और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को हस्ताक्षर करना है तो प्रक्रिया में काफ़ी तेज़ी लानी होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु क़रारः होठों से प्याले तक की दूरी24 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना अमरीकी सीनेट की समिति ने मंज़ूरी दी23 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना परमाणु समझौताः कुछ क़दम और...19 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना भारत-अमरीका संबंधों पर असर पड़ेगा12 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना 'ईंधन आपूर्ति की क़ानूनी बाध्यता नहीं'12 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना बुश के बयान पर भारत का जवाब12 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस समझौता अमरीकी संसद को भेजा गया11 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना 'परमाणु सहयोग के प्रारंभिक कदम शुरु'11 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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