BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 18 सितंबर, 2008 को 07:11 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
शौचालय नहीं बनवाया तो कुर्सी गई

एक महिला सरपंच
घरों में शौचालय न होने से ग्रामीणों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है
छत्तीसगढ़ में घर पर शौचालय न बना पाने के कारण पंचायत सदस्यों को अपने पद से हाथ धोना पड़ रहा है.

हालाँकि पूरे राज्य में ऐसे कितने मामले हैं इसका कोई सामूहिक आंकड़ा मौजूद नहीं है, लेकिन राजधानी रायपुर से लगे बिलासपुर में ही ज़िला प्रशासन ने ऐसे क़रीब सौ सदस्यों को दण्डित किया है जो अपने घर में शौचालय (फ्लश वाला पाखाना) नहीं बना पाए.

जिलाधिकारी सुबोध सिंह ने कहा है कि लोगों की शिकायत और ख़ुद होकर की गई जाँच के आधार पर प्रशासन ने पाया कि इन सदस्यों के घर पर पक्के शौचालय नहीं हैं.

उनका कहना है कि पहले तो दोषी जनप्रतिनिधियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और फिर उन्हें पद से हटाने के आदेश जारी किए गए.

छत्तीसगढ़ और भारत के कई अन्य राज्यों के पंचायती राज क़ानून के मुताबिक़ उन सदस्यों को जिनके घर शौचालय नहीं हैं, निर्वाचित होने के एक साल के भीतर घर में शौचालय बनवाना ज़रूरी है वरना उनकी सुनवाई के बाद उनकी सदस्यता ख़त्म की जा सकती है.

स्वच्छता के लिए

प्रशासन का कहना है कि जांजगीर-चाँपा और राज्य के अन्य ज़िलों में भी अधिकारी सदस्यों के घर जाकर जाँच कर रहे हैं.

 जब जनता द्वारा चुने गए इलाके में प्रभाव रखने वाले यह लोग शौचालयों का इस्तेमाल शुरू कर देंगे तो आम लोग भी ऐसा करने को प्रेरित होंगें
पीपी सोती, निदेशक, छत्तीसगढ़ शासन

अधिकारियों का कहना है कि जहाँ वे नहीं जा पा रहे हैं वहाँ के सदस्यों से सबूत के तौर पर बनवाए गए शौचालयों की तस्वीरें माँगी जा रही हैं, कारण बताओ नोटिस जारी हो रहे हैं, और आने वाले दिनों में कुछ और पंचायत सदस्यों को पद से हटाया जा सकता है.

अतिरिक्त ज़िलाधीश धनंजय देवांगन, जिनकी अदालत ने ऐसे कई मामलो में फ़ैसला सुनाया है, कहते हैं, "इस तरह के सभी मामलों में अलग-अलग सुनवाई होती है और फिर फ़ैसला सुनाया जाता है."

कुछ मामलों में सदस्यों ने सुनवाई के दौरान भी शौचालय तैयार करवा लिया और फिर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई रोक दी गई.

ऐसे मामलों में पंचायत सदस्यों को हटाये जाने के बाद राज्य चुनाव आयोग रिक्त हुए स्थानों के लिए उपचुनाव करवाता है.

देश के कई राज्यों ने अपने पंचायती राज कानून में प्रतिनिधियों के लिए अपने घरों में शौचालय बनवाने की शर्त भारत सरकार के विशेष स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के इरादे से किया गया है.

शौचालय
आमतौर पर ग्रामीण इलाक़ों में पक्के शौचालय नहीं बनावाए जाते

भारत ने इस अभियान के तहत नागरिकों को साफ़ पेय जल मुहैया कराने, खुले स्थानों पर शौच करने को ख़त्म करने और सर पर मैला ढोने की कुरीति को ख़त्म करने के इरादे से शुरू किया गया है.

और इन कामों के लिए भारत सरकार राज्य सरकारों को बड़ा अनुदान देती है.

छत्तीसगढ़ शासन में निदेशक पीपी सोती कहते हैं कि कानून में शौचालय न बनाने पर पद से हटाए जाने का प्रावधान स्वछता को बढ़ावा देने के लिए किया गया है.

"जब जनता द्वारा चुने गए इलाके में प्रभाव रखने वाले यह लोग शौचालयों का इस्तेमाल शुरू कर देंगे तो आम लोग भी ऐसा करने को प्रेरित होंगें."

छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि उसने हाल के वर्षों में 11 लाख परिवारों को घर में शौचालयों के निर्माण के लिए आर्थिंक मदद मुहैया करवाई है और स्थानीय निकायों के अधिकांश सदस्यों ने पंचायत कानून की शर्त को पूरा कर लिया है.

अधिकारियों का कहना है कि जो अब तक ऐसा नहीं कर पाए हैं, उम्मीद है वह अब तो इसे कर ही लेंगें.

शौचालयशौचालय या कुर्सी
हज़ारों जनप्रतिनिधियों के पद ख़तरे में हैं क्योंकि उनके घरों पर शौचालय नहीं बने.
शौचालयटॉयलेट बनाम टिकट
ग्राम पंचायत के चुनाव वे न लड़ पाएँ जिनके घरों में शौचालय नहीं हैं.
इससे जुड़ी ख़बरें
'दुनिया के लिए मिसाल है पंचायती राज'
24 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस
'औरतों के सब्ज़ी बेचने पर प्रतिबंध'
29 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस
पंचायत ने क्रिकेट पर प्रतिबंध लगाया
04 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस
बोली लगाकर चुने गए पंचायत सदस्य
10 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस
दो बच्चों के नियम को लेकर विवाद
20 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>