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बुधवार, 23 अप्रैल, 2008 को 23:32 GMT तक के समाचार
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पंचायत प्रतिनिधियों ने माँगे और अधिकार
निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि (फ़ाइल फ़ोटो)
केरल, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के अलावा शेष राज्यों में पंचायतों को पूरे अधिकार नहीं दिए गए हैं
देश भर से आए पंचायत प्रतिनिधियों ने एक प्रस्ताव पारित करके अपने लिए आर्थिक स्वायत्तता के अलावा कई अधिकारों की माँग की है.

दिल्ली में हो रहे पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में बुधवार को यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया.

यह प्रस्ताव गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कौ सौंपा जाएगा.

पंचायती राज को लागू हुए 15 वर्ष बीत जाने के अवसर पर यह सम्मेलन हो रहा है और इसमें एक तरह से यह रिपोर्ट कार्ड तैयार करने का प्रयास भी हो रहा है कि इन बरसों में क्या हुआ और क्या नहीं हुआ.

उल्लेखनीय है कि इस समय देश भर में पंचायती राज में 26 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि हैं जिनमें से 10 लाख से अधिक महिलाएँ हैं.

प्रस्ताव

बुधवार को दिल्ली के बुराड़ी मैदान में एकत्रित इन प्रतिनिधियों ने एक प्रस्ताव पारित किया.

मणिशंकर अय्यर
मणिशंकर अय्यर को पंचायती राज का सूत्रधार माना जाता है

इस प्रस्ताव में माँग की गई है कि 29 मदों में केंद्र सरकार जो पैसे देती है वह सीधे ग्राम प्रधान तक पहुँच जाना चाहिए.

इसमें पंचायतों को कई और आर्थिक स्वायत्ता देने की माँग की गई है.

इस प्रस्ताव में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के नियम को ख़त्म करने की भी माँग की गई है.

पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव टीआर रघुनंदन ने बीबीसी से हुई बातचीत में माना कि केंद्र से जो पैसा पंचायतों के लिए जाता है वह सीधे योजना पर खर्च होने की बजाय कहीं और खर्च हो जाता है.

पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर ने बीबीसी से कहा, "बहुत से राज्यों में अभी पंचायती राज को मज़बूत करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई नहीं देती."

उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी में ही कई लोग सोचते हैं कि जो काम अफ़सर करते हैं उसे पंचायतों के चुने हुए प्रतिनिधि कैसे कर सकते हैं."

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के आँकड़ों के खेल में पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या 26 लाख है जबकि उनको अधिकार देने का विरोध करने वालों की संख्या विधानसभाओं और संसद में कुल मिलाकर पाँच लाख ही है.

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