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राजस्थान हिंसा की जाँच के आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान सरकार ने मई और जून 2007 में गूजर आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए हैं. सोमवार रात को दिए गए इन आदेशों के तहत पूर्व न्यायाधीश फतेह चंद बंसल को इस जाँच की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. राजस्थान विधानसभा का मंगलवार से सत्र शुरू हो रहा है और गूजर विधायकों ने घोषणा की थी कि न्यायिक जाँच की घोषणा नहीं हुई तो वे सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे. हालांकि इसके पहले राजस्थान सरकार ने गूजर समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के मामले पर जस्टिस जसराज चोपड़ा समिति गठित की थी. राजस्थान में हिंसा की घटनाएँ 29 मई से 4 जून के बीच हुईं थीं. ग़ौरतलब है कि इस हिंसा में 25 लोग मारे गए थे जिसमें पुलिस फ़ायरिंग में 19 और चार लोग जातीय संघर्ष में मारे गए थे. हिंसा में दो पुलिसवालों की भी मौत हो गई थी. इसके अलावा पुलिस कार्रवाई में 93 लोग घायल हुए थे, जातीय संघर्ष में 32 लोग घायल हुए थे. सरकारी अनुमानों के अनुसार लगभग सात करोड़ की सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचा था. इस दौरान सड़क जाम की 231 घटनाएँ हुईं थीं, 15 स्थानों पर रेल संपत्ति को नुक़सान पहुँचा था और लाठी चार्ज व ऑसू गैस की 30 घटनाएँ हुईं थीं. पुलिस ने हिंसा के ख़िलाफ़ कार्रवाई में लगभग 1800 लोगों को गिरफ़्तार किया था. साथ ही बूंदी, जयपुर, दौसा, भरतपुर और सवाई माधोपुर में फ़ायरिंग करनी पड़ी थी. गूजरों की माँग ग़ौरतलब है कि राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वे अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की मांग कर रहे हैं.
इसको लेकर गूजर समुदाय सड़कों पर उतर आया था और उनके आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया था. इस आंदोलन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों समेत 26 लोगों की जानें गई थीं. राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में भी गूजर समाज के लोग इस आंदोलन से जुड़ गए थे. इस दौरान हुए धरने-प्रदर्शनों के कारण सामान्य जनजीवन भी ख़ासा प्रभावित हुआ था. लगभग दो सप्ताह तक चले उग्र आंदोलन के बाद चार जून को गूजरों नेताओं और राजस्थान सरकार के बीच एक समझौता हो गया था. |
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