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गूजरों के बंद पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने गूजर आंदोलनकारियों के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली बंद के दौरान हुई हिंसा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे ''राष्ट्रीय शर्म'' करार दिया है. कोर्ट ने इस घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन को मदद के लिए नियुक्त किया है. राजीव धवन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट विरोध करने के अधिकार को मानता है लेकिन जिस तरह बंद के दौरान लोगों ने आपराधिक गतिविधियां की हैं उससे कोर्ट नाराज़ हैं. धवन का कहना था कि कोर्ट चाहता है कि उन लोगों के ख़िलाफ कार्रवाई हो जिन्होंने आपराधिक कृत्य किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से चैनल विरोध प्रदर्शनों का सीधा प्रसारण कर रहे थे उससे ये लग रहा था कि विरोध करने वाले गर्व महसूस कर रहे थे. अदालत ने कहा कि विरोध करने वालों ने जम कर तोड़फोड़ की और लगा नहीं कि कोई उन्हें रोक भी रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त से पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है और पूछा है कि उन्होंने हिंसा रोकने के लिए क्या उपाय किए थे और अब उन लोगों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की जा रही है जिन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. इसके साथ ही न्यायायल ने दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों से हलफनामा दायर करने के लिए भी कहा है. मामले की अगली सुनवाई 18 जून की तय की गई है और पुलिस महानिदेशकों से दस दिनों में हलफनामा दायर करने के लिए कहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'सीलिंग' पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार23 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस 'ओबीसी कोटा पर रोक हटाने की अपील'16 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस ओबीसी मामले पर सुनवाई 23 अप्रैल को18 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस गूजर नेताओं के साथ अहम बातचीत04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस गूजर समुदाय ने आंदोलन वापस लिया04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस सरकार और गूजरों के बीच समझौता04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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