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गूजरों ने तीन महीने का समय दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के राज्य राजस्थान में हुई गूजर समुदाय की महापंचायत में प्रस्ताव पारित किया गया है कि राज्य सरकार केंद्र से गूजरों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की अनुशंसा करे. इसके लिए गूजर समुदाय की ओर से राज्य सरकार को तीन महीने की मोहलत दी गई है. पारित प्रस्ताव में माँग की गई है कि पिछले दिनों गूजरों के आंदोलन के दौरान जो लोग मारे गए थे, उनकी मौत की न्यायिक जाँच की जाए और राज्य की मुख्यमंत्री को इन घटनाओं की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया जाना चाहिए. आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को पर्याप्त मुआवज़ा देने और पीड़ित परिवारों में से कम से कम एक व्यक्ति को नौकरी देने की भी माँग की गई है. रविवार को पु्ष्कर में आयोजित गूजर समुदाय की राष्ट्रीय महापंचायत में यह भी कहा गया है कि समाज पिछले महीने आरक्षण मसले पर राजस्थान सरकार के साथ हुए समझौते पर क़ायम है. आगे की रुपरेखा महापंचायत में गूजर समुदाय के लोग अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की अपनी माँग को लेकर चल रहे आंदोलन की आगे की रूपरेखा पर विचार करने के लिए इकट्ठा हुए. गूजरों ने कहा है कि सरकार अगर अगले तीन महीने में कुछ सार्थक क़दम नहीं उठाती है तो गूजर समाज की ओर से झालावाड़ और धौलपुर में भी महापंचायतें की जाएंगी. ग़ौरतलब है कि ये दोनों की ज़िले राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के क्षेत्र माने जाते हैं. गूजरों ने दिल्ली में भी एक बड़ी पंचायत बुलाने की घोषणा की है. आंदोलन की आगे की रणनीति के तौर पर 29 जून से चार जुलाई तक मृतक गूजरों की स्मृति में जगह-जगह श्रद्धांजलि सभाएँ करने का भी निर्णय लिया गया है. महापंचायत में हाथ उठाकर प्रस्ताव पारित किए गए. समुदाय के लोगों को राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा हासिल है पर पिछले कुछ समय से इस जाति के लोग अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे हैं. आंदोलन जारी इस महापंचायत में गूजर समुदाय की ओर से कहा गया है कि वे गांधीवादी तरीके से अपने आंदोलन को जारी रखेंगे. साथ ही देशभर के गूजर समुदाय के लोगों से अपील भी की गई कि वे अपने-अपने राज्यों में आंदोलन को अपना समर्थन देते रहें. महापंचायत को संबोधित करते हुए दिवंगत गूजर नेता राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट ने कहा, “हम इस भ्रम को दूर कर देना चाहते हैं कि हम राजनीति के क्षेत्र में आरक्षण की माँग नहीं कर रहे हैं. हम तो शिक्षा और नौकरियों में गूजर समाज को वरीयता मिलने के लिए उन्हें अनुसूचित जाति में शामिल करने की माँग कर रहे हैं.” इस महापंचायत में राजस्थान के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से भी गूजर समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए. समझौता पिछले महीने आरक्षण की माँग को लेकर शुरू हुए गुजरों के आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया था. इस आंदोलन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों समेत क़रीब दो दर्जन लोगों की जानें गई थीं. राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में भी गूजर समाज के लोग इस आंदोलन से जुड़े. इस दौरान हुए धरने-प्रदर्शनों के चलते सामान्य जनजीवन भी ख़ासा प्रभावित हुआ था. लगभग दो सप्ताह तक चले उग्र आंदोलन के बाद चार जून को गूजरों नेताओं और राजस्थान सरकार के बीच एक समझौता हो गया था. |
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