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बंगलौर में नरेंद्र मोदी का जलवा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात के मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी में अपनी हीरो नंबर वन की पहचान को मज़बूत करने में लगे है. विपक्ष ने मोदी को जितना कोसा और अमरीका ने वीज़ा देने से इनकार किया, इन सबसे मोदी का नुक़सान नहीं हुआ बल्कि पार्टी में उनकी हैसियत बढ़ी ही है. हर बैठक में जहाँ मोदी होते है और अपना मुँह खोलते हैं वही भीड़ खिंची चली आती है जिसमें सिर्फ़ कार्यकर्ता ही नहीं, पत्रकार भी होते हैं. इस बार भी बंगलौर में मोदी का जलवा देखने लायक था. जहाँ ज़्यादातर नेता सफ़ेद कुर्ता पहने कार्यकारिणी पहुँचे वहीं मोदी काली पैंट-शर्ट में नज़र आए. मीडिया से घिरने पर बोले "अभी तीन दिन आपको बहुत सुनने को मिलेगा, फ़िलहाल मुझे छोड़ दीजिए", एक अच्छे ऐक्टर की तरह वो भी टाइमिंग का महत्व जानते हैं. पहले दिन कुछ बोलने से क्या फ़ायदा, बोले तब जब लोहा गरम हो. और बोले ऐसे मुद्दे पर जो उनकी सुपरमैन की छवि को और भी चमकाए, इसलिए वो आज आतंकवाद पर बोले.. जो गुजरात में आतंकवाद विरोधी कानून का समर्थन नही करते वो आतंकवादियों का समर्थन करते है और जो गुजरात में ऐसा कानून चाहते हैं वो आतंकवाद के खिलाफ हैं. मोदी की ऐसी छवि यूँ ही नही बनी है. गुजरात दंगो के बाद देश-दुनिया में विरोध झेल चुके मोदी ने अपनी छवि में बदलाव किया, पिछले छह सालों में वे विकास को ही अपना मुख्य मुद्दा बनाते रहे . यहाँ तक कि गुजरात में चुनावो में भी सोनिया गाँधी के 'मौत के सौदागर' वाले बयान ने धर्म आदि को राजीनीतिक भाषणों का हिस्सा बनाया, तब तक चुनाव विकास के नाम पर लड़ा जा रहा था. भारतीय जनता पार्टी के नेता मानते है कि युवाओ और महिलाओ में वे बहुत लोकप्रिय हैं और विश्व हिंदू परिषद् जैसे संघ के संगठनों के अहम नेताओं को नाराज़ करने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी पर वो अपनी पकड़ मज़बूत बना पाए हैं. पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार आडवाणी गुजरात से सांसद हैं और मोदी का लोहा मानते है. एक कार्यकारिणी में उन्होंने सभी बीजेपी मुख्यमंत्रियो से कहा था कि वे मोदी की तरह सरकार चलाने की सीख ले. इस हिदायत ने कई नेताओ के मन में कड़वाहट पैदा की थी हालाँकि पार्टी में कुछ ऐसे भी नेता है जो मोदी की पार्टी में धाक से परेशान भी हैं. यहाँ बंगलौर में भी राजनीतिक प्रस्ताव में मोदी के हस्तक्षेप से नाराज़ होकर एक मुख्यमंत्री कार्यकारिणी से वापस चली गईं पर मोदी का जलवा ऐसा है कि आप उन्हे निर्विकार भाव से देख नही सकते. आप उनसे नफरत कर सकते है या फिर उन्हें तारणहार के रूप में देख सकते है. और बीजेपी को लगता है कि वाजपेयी जैसी शख्सियत और उनके जैसी व्यापक लोकप्रियता आज किसी नेता में नहीं है. पर जो बात मोदी में है वो भी पार्टी के किसी और नेता में नहीं, चुनाव जिताने वाले एक ऐसे विकास पुरूष जो दक्षिणपंथी विचारधारा को विकास का जामा पहनाकर परोस सकता है और जिसका अपने विरोधियो को सीधा संदेश होता है कि अगर आपको मेरा स्टाइल पसंद नहीं, तो कही और चले जाएँ. | इससे जुड़ी ख़बरें 'तरकीबों, प्रचार के बावजूद पॉज़िटिव वोट'23 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफ़र23 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अपना लोहा मनवाते नरेंद्र मोदी24 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार कुर्सी संभाली25 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस एक मुलाक़ात, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ04 मई, 2008 | भारत और पड़ोस मोदी के बयान से कांग्रेस नाराज़11 जून, 2008 | भारत और पड़ोस पुलिस की पीठ ठोंकी मुख्यमंत्री मोदी ने01 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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