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नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफ़र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सबसे विवादास्पद मुख्यमंत्रियों में से एक नरेंद्र मोदी एक बार फिर गुजरात के मुख्यमंत्री बन रहे हैं. नरेंद्र मोदी की अगुआई में 2002 में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव जीता था जिसके बाद अब एक बार फिर राज्य में बीजेपी की सरकार बन रही है. बीजेपी ने लगातार पाँचवीं बार गुजरात में सरकार बनाई है जिनमें से दो चुनाव पार्टी ने मोदी की अगुवाई में लड़े. वर्ष 1990, 1995, 1997, 2002 में भाजपा राज्य की सत्ता संभाल चुकी है. यह तीसरी बार होगा जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे और राज्य की सत्ता की बागडोर संभालेंगे. नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को उत्तरी गुजरात के मेहसाणा ज़िले के वादनगर में हुआ था. राजनीति शास्त्र में एमए कर चुके मोदी वर्ष 1972 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बने. राजनीतिक सफ़र वर्ष 1984 से नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफ़र की शुरुआत हुई. संघ ने 1984 में जिन चंद लोगों को भारतीय जनता पार्टी में भेजा उनमें नरेंद्र मोदी भी एक थे.
इसके बाद मोदी ने राजनीति के क्षेत्र में अपनी पैठ बनाई और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का विश्वास हासिल किया. मोदी ने पार्टी के प्रचार की बागडोर साधी और 1995 में दो-तिहाई सीटों के स्पष्ट बहुमत के साथ राज्य में पार्टी की सरकार बनी. मोदी की भूमिका संगठन में एक सक्रिय व्यक्ति की रही पर सत्ता के गलियारों से उनकी दूरी बनी रही. यह दूरी 2001 में उस समय ख़त्म हुई जब बीजेपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने इस्तीफ़ा दे दिया था. मोदी ने वर्ष 2001 में राज्य की बागडोर संभाली. इसके बाद राज्य ने 2002 के दंगे देखे. 'हिंदू हृदय सम्राट' मोदी के शासनकाल में 2002 में गुजरात में दंगे हुए जिसमें कम से कम दो हज़ार अल्पसंख्यकों की मौत हो गई थी.
दंगे तब भड़के जब अयोध्या से कारसेवकों को लेकर आ रही साबरमती एक्सप्रेस में गोधरा स्टेशन पर आग लगी और 58 कारसेवक मारे गए. इसके बाद देश और दुनियाभर में मोदी की छवि एक कट्टर हिंदुत्ववादी नेता के तौर पर उभरी. मीडिया ने उन्हें 'हिंदू हृदय सम्राट' तक की संज्ञा दे दी. पर दूसरी ओर मोदी कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा में विश्वास रखनेवाले लाखों लोगों के लिए एक हीरो बनकर सामने आए. जिस तेज़ी से मोदी की निंदा और आलोचना हुई, उसी तेज़ी से मोदी का उन्हें स्वीकारनेवालों के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक कद भी बढ़ता गया. कभी अफ़ज़ल गुरू तो कभी सोहराबुद्दीन मामले में अपनी टिप्पणियों के लिए भी मोदी की आलोचना होती रही और इससे उनकी कट्टर हिंदुत्ववादी की छवि मज़बूत हुई. पर इतना ही नहीं, राज्य के विकास की ख़ातिर मोदी ने सधे और संभले हुए क़दम भरे जिससे नई पीढ़ी और मध्यमवर्ग के बीच उनका वर्चस्व क़ायम हुआ. | इससे जुड़ी ख़बरें चुनाव: मोदी की राजनीतिक कसौटी05 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अख़बारों में मोदी की आलोचना07 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस या तो आप मोदी के साथ हैं या ख़िलाफ़10 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस गुजरात विधानसभा चुनाव: कांटे की टक्कर10 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस मोदी के 'बयान' पर सुनवाई टली10 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस ग़लत ढंग से पेश किया बयानः नरेंद्र मोदी08 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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