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गुरुवार, 04 सितंबर, 2008 को 08:58 GMT तक के समाचार
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भाजपा ने कहा, विशेष सत्र बुलाएँ
यशवंत सिन्हा
भाजपा इससे पहले भी सरकार पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाती रही है
भारतीय जनता पार्टी ने यूपीए पर परमाणु क़रार के मामले में देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए इस पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की माँग की है.

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि सरकार के ख़िलाफ़ वह विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगी.

भारत-अमरीका परमाणु क़रार पर वॉशिंगटन पोस्ट में छपे पत्र के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्षी दल सरकार पर आरोप लगा रहे हैं.

हालांकि सरकार ने कहा है कि यह अमरीका का अंदरुनी मामला है और परमाणु क़रार पर भारत का रूख़ अभी भी वही है जो पहले था.

यह पत्र ऐसे समय में प्रकाशित हुआ है जब गुरुवार को विएना में परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) की अहम बैठक होने जा रही है जिसमें इस समझौते को मंज़ूरी दी जानी है.

आरोप

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेशमंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा, “करार के बारे में भारत सरकार जो जानकारी संसद में और देश की जनता को दे रही है, और जो जानकारी अमेरिकी संसद अपने देश के लोगों को दे रही है, दोनों में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है.”

 क़रार के बारे में सरकार ने संसद में झूठ बोला और सरकार अब शुतुरमुर्ग के समान बर्ताव कर रही है
यशवंत सिन्हा

दिल्ली में एक पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा, "क़रार के बारे में सरकार ने संसद में झूठ बोला और सरकार अब शुतुरमुर्ग के समान बर्ताव कर रही है."

उन्होंने कहा कि इस सरकार को अब सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उसे तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और भारत के पूर्व विनिवेश मंत्री अरूण शौरी ने कहा, “अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के गुप्त पत्र से जाहिर हो गया कि परमाणु क़रार पर भारत और अमरीका की स्थिति अलग अलग है.सरकार इस बात को भलीभाँति जानती है कि लेकिन उसने इन बातों को दबा दिया.”

भाजपा ने कहा कि परमाणु परीक्षण करने की दशा में भारत को परमाणु ईंधन की आपूर्ति बंद हो जाएगी. सरकार इस बात को जानती है लेकिन वह देश को गुमराह कर रही है.

वाशिंगटन पोस्ट ने जो ख़बर प्रकाशित की है उसके मुताबिक़ बुश प्रशासन ने अमरीकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हॉवर्ड बर्मन को नौ महीने पहले एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि भारत परमाणु परीक्षण करेगा तो अमरीका भारत के साथ परमाणु व्यापार तुरंत रोक देगा और अमरीका भारत को संवेदनशील परमाणु तकनीक नहीं देगा.

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