BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 13 अगस्त, 2008 को 21:52 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
जम्मू कश्मीर में स्थिति बेहद तनावपूर्ण

भारत प्रशासित कश्मीर
ऐसे हालात बन गए हैं कि सरकार और राजनीतिक दल बेबस नज़र आ रहे हैं
भारत प्रशासित कश्मीर में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और लोग दुआ कर रहे हैं कि अगले दो दिन यानि 14 अगस्त पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस और 15 अगस्त भारत का स्वतंत्रता दिवस बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के निकल जाए.

कुल मिलाकर घाटी में हालात फ़िलहाल बेहद नाजुक बने हुए हैं, हालांकि बुधवार को दिन भर कर्फ़्यू मे ढील दी गई और सुरक्षाबलों ने संयम का परिचय दिया है और कोई बड़ी अप्रिय घटना नही हुई है.

अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन दिए जाने का मुद्दा अब कहीं पीछे छूट गया है और घाटी में एक बार फिर वो नारे बुलंद हो रहे हैं जो पिछले कई वर्षों के दौरान यहाँ के लोग भूल चले थे.

 इस बार जम्मू कश्मीर में जो हालात बने हैं, उसमें सबसे ख़तरनाक बात ये है कि जम्मू और कश्मीर को एक दूसरे के मुक़ाबले खड़े करने की कोशिश की जा रही है
मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी, सीपीएम नेता

यहाँ की स्थिति देख कर कोई अंदाज़ा तक नही लगा सकता कि महीने भर पहले तक यहाँ चुनाव का माहौल गर्मा रहा था और चुनाव के अलावा कोई बहस नज़र नही आती थी.

मुख्यधारा मे शामिल एक पार्टी के नेता ने बीबीसी से बातचीत में टिप्पणी की कि महीने भर पहले तक यहाँ पृथकतावादियों को पूछने वाला कोई नहीं था और अब हालत ये है कि राजनीतिक पार्टियों को पूछने वाला कोई नहीं है और पृथकतावादी हीरो बने हुए हैं.

कौन ज़िम्मेदार?

श्रीनगर में रहने वाले राजनीतिक विश्लेषक नूर मोहम्मद बाबा कहते हैं कि इन हालात के लिए सरकारों का रवैया ज़िम्मेदार है.

कश्मीर में विरोध
घाटी में एक बार फिर वो नारे बुलंद हो रहे हैं जो यहाँ के लोग भूल चले थे

उनके अनुसार जब कश्मीर में स्थिति सामान्य बनी रहती तो सरकारें यहाँ के लोगों की अपेक्षाओं ओर मुद्दों के प्रति लापरवाह हो जाती हैं, जिसकी वजह से उनका रोष दबा तो रहता है, पर समाप्त नही होता.

और जब भी ऐसे हालात बनते हैं तो फिर सरकारें और राजनीतिक दल बेबस नज़र आते हैं.

सीपीएम के सचिव और घाटी में राजनीति मे अच्छा प्रभाव रखने वाले मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी कहते हैं कि इस बार जम्मू कश्मीर में जो हालात बने हैं, उसमें सबसे ख़तरनाक बात ये है कि जम्मू और कश्मीर को एक दूसरे के मुक़ाबले खड़े करने की कोशिश की जा रही है.

वो मानते हैं कि सरकार और राजनीतिक दलों के गै़रज़िम्मेदाराना रवैए के कारण स्थिति इतनी नाज़ुक बन गई है.

घाटी के नाजुक हालात से निपटने के बारे में नूर मोहम्मद बाबा कहते हैं कि भारत सरकार को संजीदगी से कश्मीर मसले पर विचार करना होगा क्योंकि ये प्रक्रिया जितनी आंतरिक है, उतनी ही भारत और पाकिस्तान के बीच की भी है.

 भारत सरकार को संजीदगी से कश्मीर मसले पर विचार करना होगा क्योंकि ये प्रक्रिया जितनी आंतरिक है, उतनी ही भारत और पाकिस्तान के बीच की भी है
नूर मोहम्मद बाबा, राजनीतिक विश्लेषक

वो मानते हैं कि जहाँ भारत सरकार को कश्मीर के लोगों की अपेक्षाओं और आशंकाओं पर ध्यान देना होगा वही भारत सरकार को पाकिस्तान के साथ भी इस मसले को सुलझाने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए.

यूसुफ़ तारिगामी कहते हैं कि इस मसले के हल के लिए तुरंत बातचीत का माहौल बनाने की ज़रूरत है.

हालांकि वो मानते हैं कि हालात नाजुक हैं और ये काम आसान नहीं, पर वो ये मानते हैं कि अत्याधित बल प्रयोग करने की बजाए सरकार को बातचीत का माहौल बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए, वरना घाटी में उन लोगों की राजनीति कामयाब होगी जो यहाँ शांति नहीं चाहते.

लेकिन इस पूरी बहस के बीच आम कश्मीरी जिसकी नुमाइंदगी का दम अलगावादियों से लेकर राजनीतिक दलों तक सब भरते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहाल हो गई है.

स्कूल कालेज बंद हैं, पर्यटन उद्योग ठप्प पड़ा है, बाज़ारों मे सन्नाटा है और ज़िदगी के लिए बेहद ज़रूरी चीज़ों के लाले पड़े हैं. नेता फ़िलहाल उनका पेट तक़रीरों से भर रहे हैं.

राह नज़र नहीं आती
दोनों पक्षों की हठधर्मिता के कारण अमरनाथ मसले का हल नज़र नहीं आ रहा है.
जम्मू में प्रदर्शन (फ़ाइल फ़ोटो)जम्मू में सेना
जम्मू शहर में बिगड़े हालात पर काबू पाने के लिए सेना को बुलाया गया है.
अमरनाथ यात्रीअमरनाथ का विवाद...
अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन देने का क्यों हो रहा है विरोध? एक विश्लेषण..
इससे जुड़ी ख़बरें
'कश्मीर की हालत पर दुनिया ध्यान दे'
13 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस
बेनतीजा रही सर्वदलीय बैठक
12 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस
'व्यापारी वैकल्पिक रास्ता न अपनाएँ'
10 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस
दो प्रदर्शनकारियों की मौत से तनाव
04 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस
जम्मू के बाद श्रीनगर में हिंसा
04 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>