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हुर्रियत नेता की मौत, पूरे श्रीनगर में कर्फ़्यू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में मुज़फ़्फ़राबाद मार्च करने की कोशिश कर रहे लोगों पर सेना की फ़ायरिंग में हुर्रियत नेता शेख़ अब्दुल अज़ीज़ सहित पाँच लोगों की मौत हो गई है. फ़ायरिंग की ताज़ा घटना बारामूला से 25 किलोमीटर दूर उरी के पास हुई. वहाँ शब्बीर शाह गिलानी और शेख अब्दुल अज़ीज़ की अगुआई में लाखों लोग सीमा पार करने की कोशिश कर रहे थे. सेना ने उन्हें आगे जाने से रोकने की कोशिश की और इसमें विफल रहने पर सेना की ओर से फ़ायरिंग की गई जिसमें शेख़ अज़ीज़ बुरी तरह घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई. इस घटना से कुछ घंटे पहले ही मुज़फ़्फ़राबाद मार्च करने वालों पर हुई फ़ायरिंग में दो लोग मारे गए थे. श्रीनगर और सोपोर में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई में सैंकड़ों लोग घायल हुए हैं. शेख अब्दुल अज़ीज़ हुर्रियत कॉंफ़्रेंस के वरिष्ठ नेता थे और उनकी मौत की ख़बर के बाद पूरी घाटी में हालात बिगड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई है.
इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पूरे श्रीनगर में कर्फ़्यू लगा दिया है. मुज़फ़्फ़राबाद मार्च कुछ लोग घायल भी हुए हैं जिन्हें श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ग़ौरतलब है कि अमरनाथ ज़मीन मुद्दे पर जम्मू में जारी आंदोलन के कारण कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर यातायात बाधित है. घाटी के नेताओं का कहना है कि कश्मीर के आर्थिक बहिष्कार की कोशिश हो रही है और सड़क बंद होने के कारण फल उत्पादकों के पास मुज़फ्फ़राबाद के रास्ते पाकिस्तान के बाज़ारों में जाने के सिवा कोई और विकल्प नहीं है. इसी के तहत व्यापारियों ने श्रीनगर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के मुज़फ्फ़राबाद के बीच सड़क पूरी तरह खोलने और नियंत्रण रेखा के पार वैकल्पिक रास्ता अपनाने की घोषणा की थी. इसी माँग को लेकर व्यापारियों ने सोमवार को मुज़फ्फ़राबाद मार्च करने की कोशिश की जिसे विफल करने के लिए सुरक्षाकर्मियों को बल प्रयोग करना पड़ा. सोमवार को श्रीनगर की मंडियों में फल से लदे अनेक ट्रक नियंत्रण रेखा की ओर जाने के लिए तैयार खड़े थे. पुलिस ने रविवार की रात को कई मंडियों को सील कर दी थी, फिर भी श्रीनगर के परिमपोरा मंडी में सैकड़ों फल उत्पादक जमा होने में कामयाब हो गए थे. वे 'जबरी नाता तोड़ दो, हमारा रास्ता खोल दो' जैसे नारे लगा रहे थे. फल उत्पादक फ़ारुक़ अहमद ने बीबीसी को बताया, "पिछली रात फलों से लदे क़रीब 30 ट्रक पुलिस उठा ले गई." इस मंडी में प्रदर्शनकारियों के छोड़ कर कोई भीड़ नहीं थी. भारपाई का आश्वासन हुर्रियत कांफ्रेस के निचले तबके के नेता प्रदर्शकारियों का नेतृत्व कर रहे थे. हुर्रियत कांफ्रेस के वरिष्ठ नेताओं को नज़रबंद कर रखा गया है. पुलिस ने श्रीनगर स्थित मंडियों की ओर जाने वाले सारे रास्ते सील कर दिए हैं. मुज़फ्फ़राबाद की ओर जाने वाली श्रीनगर-बारामुल्ला सड़क पर लोगों की गतिविधियों को भी पुलिस रोक रही है. उधर रविवार को भारतीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने भारत प्रशासित कश्मीर के व्यापारियों से अपील की थी कि वे जम्मू में जारी आंदोलन के कारण वैकल्पिक रास्ता नहीं अपनाएँ. गृह मंत्री ने कहा, "हमें बताया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रक आ-जा रहे हैं, लेकिन फिर भी अगर व्यापारियों को सुरक्षा चाहिए तो पूरी सुरक्षा दी जाएगी." उन्होंने ज़मीन विवाद के मुद्दे पर जम्मू में जारी आंदोलन के कारण घाटी के फल उत्पादकों को हुए नुकसान की भरपाई करने का भी आश्वासन दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'व्यापारी वैकल्पिक रास्ता न अपनाएँ'10 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस दो प्रदर्शनकारियों की मौत से तनाव04 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस जम्मू के बाद श्रीनगर में हिंसा04 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीनगर में हिंसा, जम्मू में उग्र प्रदर्शन05 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस बातचीत से महबूबा, फ़ारुख़, सैफ़ुद्दीन बाहर 09 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस 'फ़ैसला जो जम्मू और कश्मीर दोनों माने'09 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस पाक प्रस्ताव पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया08 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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