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शुक्रवार, 08 अगस्त, 2008 को 03:57 GMT तक के समाचार
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पाक प्रस्ताव पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया
जम्मू में प्रदर्शन
हिंसक प्रदर्शन में कई लोगों की जान जा चुकी है
भारत सरकार ने पाकिस्तानी सीनेट में भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर पारित एक प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे 'देश के अंदरूनी मामलों में दख़ल' बताया है.

पाकिस्तान के समाचार माध्यमों के अनुसार - 'सीनेट ने बुधवार को जम्मू कश्मीर के मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंदू उग्रवादियों के आर्थिक ब्लॉकेड की हाल की रिपोर्टों पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है. हिंदू उग्रवादियों के मुसलमानों पर हमलों पर भी चिंता जताई गई है.'

इस पर आपत्ति जताते हुए भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्त नवतेज सरना ने कहा, "हमने पाकिस्तानी समाचार माध्यमों में पाकिस्तानी सीनेट के जम्मू-कश्मीर के बारे में पारित प्रस्ताव पर रिपोर्टें देखी हैं. ऐसा प्रस्ताव स्पष्ट तौर पर हमारे अंदरूनी मामलों में दख़ल है. सीनेट को उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए जो उसके कार्यक्षेत्र में आते हैं."

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन दिए जाने के मुद्दे पर पिछले कुछ हफ़्तों से भीषण प्रदर्शन हो रहे हैं. जम्मू से श्रीनगर को जाने वाले राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही ठप्प हो जाने के कारण कश्मीर घाटी में जनजीवन प्रभावित हुआ है.

'सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू जाएगा'

 हमने पाकिस्तानी समाचार माध्यमों में पाकिस्तानी सीनेट के जम्मू-कश्मीर के बारे में पारित प्रस्ताव पर रिपोर्टें देखी हैं. ऐसा प्रस्ताव स्पष्ट तौर पर हमारे अंदरूनी मामलों में दख़ल है. सीनेट को उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए जो उसके कार्यक्षेत्र में आते हैं
भारतीय विदेश मंत्रालय

उधर दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर हुई एक सर्वदलीय बैठक में निर्णय हुआ कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार को जम्मू का दौरा करेगा. इस दल में विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और गृहमंत्री शिवराज पाटिल भी शामिल होंगे.

यह प्रतिनिधिमंडल जम्मू में अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही अमरनाथ संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों से भी चर्चा करेगा.

तीस से ज़्यादा राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों की अमरनाथ संघर्ष समिति माँग कर रही है कि अमरनाथ मंदिर बोर्ड को वो 100 एकड़ ज़मीन दी जाए, जिसको दिए जाने का फ़ैसला बाद में सरकार ने रद्द कर दिया था.

समिति की ये भी माँग है कि अमरनाथ यात्रा के आयोजन और प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सरकार की जगह अमरनाथ मंदिर बोर्ड ही करे.

'राज्यपाल ने बनाई समिति'

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर राज्य के राज्यपाल एनएन वोहरा ने जम्मू के प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए चार सदस्यों की समिति का गठन किया है.

सर्वदलीय बैठक
सभी दलों के नेताओं की चिंता थी कि अमरनाथ का मुद्दा सांप्रदायिक संघर्ष में न बदल जाए

सरकार की इस समिति में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य सचिव एसएस ब्लोरिया, जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय के उपकुलपति अमिताभ मट्टू, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जीडी शर्मा और अमरनाथ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीबी व्यास हैं.

ख़बरें हैं कि राज्यपाल वोहरा ने सेना और पुलिस को हिदायत दी है कि वे राजमार्ग पर गश्त लगाएँ ताकि कश्मीर घाटी को जाने वाले वाहनों की आवाजाही ने रुकावट न आए और रोज़मर्रा के ज़रूरी सामान पहुँचते रहें.

हालांकि अमरनाथ संघर्ष समिति ने बातचीत का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है लेकिन बातचीत से पहले यह भी कहा है कि ज़मीन के मसले पर वह कोई समझौता नहीं करेगी.

अमरनाथ मंदिर बोर्ड को जम्मू-कश्मीर सरकार के 100 एकड़ ज़मीन अस्थायी तौर पर दिए जाने की घोषणा की थी. इसका कश्मीर घाटी में विरोध हुआ था और हिंसा और प्रदर्शन का दौर शुरु हो गया था.

बाद में सरकार ने ज़मीन वापस लेने की घोषणा कर दी. लेकिन पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने तब तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और सरकार गिर गई.

लेकिन इसके बाद से जम्मू में हिंसा भड़की और उग्र प्रदर्शनों के दौरान कई लोग घायल हुए और कुछ मारे भी गए हैं.

आजकल जम्मू और श्रीनगर दोनों ही जगहों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस और सेना के बीच झड़पें हुई हैं.

जम्मू में सांबा, अख़नूर, जौड़ियाँ, कठुआ, राजौरी और ऊधमपुर में कर्फ़्यू लागू है और प्रदर्शन भी जारी हैं. श्रीनगर में भी प्रदर्शन हो रहे हैं और कई जाने-माने अलगाववादी नेताओं को गिरफ़्तार भी किया गया है.

कश्मीर प्रदर्शनएक और विभाजन...?
अमरनाथ मामले ने जम्मू कश्मीर को सांप्रदायिक आधार पर बाँट दिया है.
राह नज़र नहीं आती
दोनों पक्षों की हठधर्मिता के कारण अमरनाथ मसले का हल नज़र नहीं आ रहा है.
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