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'ज़मीन वापसी के मुद्दे पर समझौता नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि बातचीत को लेकर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन वह ज़मीन वापसी को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी. संघर्ष समिति के नेता लीलाकरण शर्मा का कहना था कि जब सर्वदलीय बैठक में उन्हें शामिल ही नहीं किया गया तो सरकार और नेता किस तरह उम्मीद कर सकते हैं कि अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति उनकी बातों को मान लेगी. लीलाकरण शर्मा का कहना है कि जम्मू और कश्मीर में कहीं भी किसी भी तरह के सांप्रदायिक संघर्ष का मामला देखने में नहीं आया है. दूसरी ओर अमरनाथ ज़मीन विवाद पर बातचीत के लिए भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा ने एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया है. ये समिति जम्मू में आंदोलन कर रही अमरनाथ संघर्ष समिति के साथ गुरुवार को बातचीत करेगी. दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद एनएन वोहरा ने इस चार सदस्यीय समिति का ऐलान किया था. इस समिति में जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव एसएस ब्लोरिया, जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति अमिताभ मट्टू, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व जज जीडी शर्मा और अमरनाथ मंदिर बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीबी व्यास शामिल हैं. ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा ने अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति को बालतल में बातचीत के लिए बुलाया था. अमरनाथ यात्रा बालतल से ही शुरू होती है. लेकिन उन्होंने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया था. शांति के प्रयास इसके पहले कुछ ऐसे संकेत भी मिले थे कि सरकार अमरनाथ मंदिर बोर्ड को कुछ ज़मीन देकर इस मामले को शांत करने की पहल कर सकती है.
इस संबंध में संघर्ष समिति के लीलाकरण शर्मा को भेजे गए पत्र में राज्यपाल के प्रधान सचिव ने लिखा था, " इस बारे स्पष्टता बहुत ज़रूरी है कि बालतल में मंदिर बोर्ड को विभिन्न उद्देश्यों के लिए अस्थायी तौर पर कितनी ज़मीन की ज़रूरत है, इसमें इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए कि पहले ही मंदिर बोर्ड अमरनाथ यात्रा के दौरान सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए कितनी ज़मीन का इस्तेमाल कर रहा है." दूसरी ओर अलगाववादी कश्मीरी संगठन ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने स्पष्ट कर दिया था कि अमरनाथ मंदिर बोर्ड को दोबारा ज़मीन देने पर किसी तरह की सहमति की कोई संभावना नहीं है. अमरनाथ मंदिर बोर्ड को सरकार के ज़मीन दिए जाने और उसकी वापसी के ऐलान के बाद जम्मू और श्रीनगर में भड़की हिंसा और उग्र प्रदर्शनों के दौरान कई लोग मारे जा चुके हैं और कई घायल हुए हैं. जम्मू और श्रीनगर दोनों ही जगहों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस और सेना के बीच सीधा संघर्ष हुआ है. जम्मू में सांबा, कठुआ, राजौरी और ऊधमपुर ज़िलों में कर्फ़्यू लागू है और प्रदर्शन भी जारी हैं. |
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