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'ज़मीन वापसी के बारे में देश को बताएँगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि अमरनाथ मंदिर बोर्ड को दी गई ज़मीन वापस लेने का मसला वे संसद और देश के सामने ले जाएँगे. उन्होंने कहा कि ज़मीन वापस लेकर जम्मू-कश्मीर सरकार ने अलगाववादियों के सामने घुटने टेक दिए. ज़मीन वापसी के फ़ैसले के बाद से ही जम्मू में सरकार विरोधी आंदोलन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पों के बाद मंगलवार से ही जम्मू शहर में कर्फ़्यू लगा हुआ है. भाजपा अध्यक्ष ऐसे ही माहौल में जम्मू पहुँचे हैं. उन्होंने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में सरकार के फ़ैसले की तीख़ी आलोचना की और कहा कि उनकी पार्टी इस मामले को संसद में उठाएगी. राजनाथ ने कहा, सत्तारूढ़ गठबंधन से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की समर्थन वापसी के बाद ग़ुलाम नबी आज़ाद सरकार अल्पमत में आ गई है, उसे बहुमत वाली सरकार के फ़ैसले को बदलने या वापस लेने का कोई नैतिक या वैधानिक अधिकार नहीं है. छूट के साथ कर्फ़्यू जारी
शनिवार को जम्मू बंद के छठे दिन भी जम्मू शहर के बाहरी हिस्सों में प्रदर्शन की ख़बरें हैं. भाजपा और दूसरे हिंदुवादी संगठनों ने जम्मू को रविवार तक बंद रखने का आह्नान किया है. प्रशासन ने लोगों को ज़रूरत की चीज़ें ख़रीदने के लिए जम्मू में चरणबद्ध तरीक़े से कर्फ़्यू में दो घंटे की ढील देने का आदेश दिया है. वहीं, जम्मू के बाहरी इलाक़े मुथी में प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों लोगों की पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के साथ झड़प हो गई. पुलिस ने इनलोगों को तितर-बितर करने के लिए लाठी और आँसूगैस का सहारा लिया. कठुआ, हीरानगर, उधमपुर और बरी ब्रह्मणा में भी ऐसे प्रदर्शन हुए हैं. मुस्लिम बहुत डोडा ज़िले के भद्रवाह शहर में बुधवार को लगाया गया कर्फ़्यू भी जारी है लेकिन शनिवार को इसमें एक घंटे की छूट दी गई. 'आस्था का सवाल'
राजनाथ सिंह ने कहा, "ज़मीन आवंटन का आदेश वापस लेकर सरकार ने पाकिस्तान समर्थक, अलगाववादी और मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने घुटना टेक दिया है." राज्य सरकार ने कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शनों के बाद अमरनाथ मंदिर बोर्ड को दी गई ज़मीन वापस लेने का फ़ैसला किया था. भाजपा नेता ने कहा कि यह फ़ैसला 'दुर्भाग्यपूर्ण, शर्मनाक और पूरे देश के लिए दुखद है.' उन्होंने यह भी कहा, "इस अल्पमत सरकार को इस बात का कोई नैतिक या वैधानिक अधिकार नहीं है कि वह बहुमत वाली सरकार के फ़ैसले को रद्द कर दे." ज़मीन आवंटन का विरोध करने वालों का कहना था ज़मीन देने का फ़ैसला घाटी में मुसलमानों और कश्मीरियों को अल्पसंख्यक बनाने की साज़िश का एक हिस्सा है. राजनाथ ने इन आरोपों को ख़ारिज़ कर दिया कि उनका पार्टी इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग दे रही है. उन्होंने कहा, "यह कोई धार्मिक मामला नहीं है. यह विश्वास, श्रद्धा और आस्था का मामला है." राजनाथ ने कहा कि अमरनाथ वह बंधन है जो कश्मीर को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ता है. भाजपा अध्यक्ष ने घोषणा की कि उनकी पार्टी इस मसले को संसद और पूरे देश के सामने ले जाएँगे और "हर स्तर पर इसके ख़िलाफ़ लड़ेंगे." |
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